@ उदय किरौला
1 मार्च से 5 मार्च,2021 तक राजकीय इंटर कालेज कोटबांगर, रूद्रप्रयाग में यू कास्ट के सहयोग से बच्चों की 5 दिवसीय कार्यशाला होनी थी। इसी कार्यक्रम के निमित्त 25 फरवरी को अल्मोड़ा से निकला।
25 फरवरी को प्रातः 9.15 बजे से 12 बजे तक राजकीय इंटर कालेज बसर,अल्मोड़ा में बच्चों से संवाद करने का अवसर प्राप्त हुआ। प्रधानाचार्य श्री डी डी तिवारी की पहल पर आयोजित इस कार्यशाला में बच्चों के साथ कहानी वाचन तथा त्वरित भाषण आदि कार्यक्रम हुए। इस कार्यक्रम के बाद द्वाराहाट अपने गांव कलौटिया होते हुए रुद्रप्रयाग पहुंचा।
इस बीच रूद्रप्रयाग के आस-पास के मित्रों से फोन पर संवाद हुआ। राजकीय जूनियर हाईस्कूल बैनोली की राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका डॉ. गीता नौटियाल ने प्रस्ताव रखा कि उनके स्कूल में भी जरूर आना है। मैंने प्रस्ताव रखा कि 28 को आपके विद्यालय में आ सकता हूं परंतु उस दिन अवकाश है।
उन्होंने स्कूल के प्रधानाध्यापक श्री पंवार जी तथा बच्चों से बातचीत करके 28 फरवरी को रविवार के दिन स्कूल खोलने की अनुमति मिलने की बात कहीं। द्वाराहाट गांव में पारिवारिक कार्य निबटने पर मैं एक दिन पहले ही द्वाराहाट से निकल गया। मैंने डॉ गीता जी को फोन पर बताया कि अब मैं एक दिन पहले ही पहुंच रहा हूं।
उन्होंने कहा कि एक दिन यहां घूमने का कार्यक्रम बन सकता है। मैंने उनसे कहा कि घूमने का मुझे अधिक शौक नहीं है। उन्होनें प्रधानाध्यापक जी तथा बच्चों से बातचीत कर 27 तथा 28 फरवरी को दो दिन के अवकाश में विद्यालय में बच्चों को बुलाने की बात कही थी। मुझे बहुत खुशी हुई। इस स्कूल के बच्चों की रचनाएं बालप्रहरी में प्रकाशित होते रही हैं।
इस बीच कई बच्चे बालप्रहरी की ऑनलाइन कार्यशालाओं में जुड़े। 26 की सायं जब मैं बैनोली पहुंचा तो अनन्या, अक्षत तथा अदिति कई बच्चे मेरी प्रतीक्षा कर रहे थे। सच में अच्छा लगा। 27 तथा 28 को बच्चों के साथ कई खेल किए। आदरणीय गीता जी ने 28 को दिन में एक बजे गॉव के लोगों को तो बुलाया ही था। श्रीनगर,रूद्रप्रयाग,अगस्तयमुनि आदि कई स्थानों से शिक्षकों को भी आमंत्रित किया। बच्चों ने खेलों में खूब मस्ती की। डेढ़ दिन में बच्चों ने एक नुक्कड़ नाटक व समूह गीत तैयार कर लिया। बाल कवि सम्मेलन के लिए कवियों व संचालकों का बकायदा मतदान द्वारा चुनाव हुआ। समय कम था। प्रत्येक बच्चे की किताब नहीं परंतु प्रत्येक बच्चे की रचना को जोड़ते हुए हस्तलिखित पत्रिका ‘बैनोली दर्पण’ तैयार हुई। सभी ने बच्चों के प्रयास की सराहना की। बच्चे काफी जागरूक थे। मुझे भी अधिक कुछ नहीं करना पड़ा। जहां हमारे कई साथी स्कूल के दिन स्कूल में रहकर भी क्लास में जाने से बचते हैं। वहां रविवार को भी शिक्षकों व बच्चों की भागीदारी हम सबके लिए एक प्रेरणा तो है ही। इस कार्यक्रम में बैनोली गांव से बाहर से आए लगभग 20 कवियों तथा रचनात्मक शिक्षकों का डॉ. गीता नौटियाल जी तथा उनके पति वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. बलीराम नौटियाल जी ने बकायदा शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
इस परिवार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को देखकर लोगों को लगा होगा कि जरूर कहीं से कोई प्रोजक्ट इन्हें मिला होगा। नही तो छुट्टी के दिन इतना बड़ा कार्यक्रम करने के लिए कोई पागल नहीं होता। आदरणीय नौटियाल जी किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को फोन कर रहे थे। मैंने फोन सुना। वे प्रतिष्ठित व्यक्ति कह रहे थे कि आप मुझे जब भी बुलाएं। कम से कम एक सप्ताह पहले सूचना दें। इतनी जल्दी मैं नहीं आ सकता हूं। शायद सत्तारूढ़ पार्टी से जुडे़ कोई सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन सज्ज्जन की नाराजगी साफ झलक रही थी। मुझे गांव के लोगों से पता लगा कि इस परिवार ने समीप के गांव की एक विशेष आवश्यकता वाली प्रतिभावान बालिका सिमरन रावत की रचनाओं को जोड़ते हुए उसकी पुस्तक ‘हौसले की जीत’ के प्रकाशन के लिए अपने स्तर से लगभग 40 हजार रुपए व्यय किए। उस पुस्तक की बिक्री से प्राप्त धनराशि भी उस बालिका के खाते में जमा करवाई। गांव वालों ने बताया कि डॉ. गीता नौटियाल व उनका परिवार समय-समय पर असहायों की मदद करता है।
इस परिवार के दोनों लोग बालप्रहरी के आजीवन सदस्य हैं। इस बार उन्होंने ज्ञान विज्ञान बुलेटिन की संरक्षक सदस्यता 5000 रुपए जमा कर प्रत्येक वर्ष ज्ञान विज्ञान बुलेटिन के एक अंक के प्रकाशन के लिए सहयोग करने को कहा है।
रूद्रप्रयाग के ग्रामीण अंचल में 1 से 5 मार्च तक बच्चों की लेखन कार्यशाला के लिए भी राजकीय इंटर कालेज कोटबांगर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री बलीराम नौटियाल की पहल रही। ग्रामीण अंचल के इस विद्यालय के बच्चे ग्रामीण पृष्ठभूमि के थे। उसके बावजूद बच्चों ने पांच दिन में लगभग 16 पृष्ठ की अपनी-अपनी हस्तलिखित पुस्तक तैयार की। यहां पांच दिन के बाद बच्चों की हस्तलिखित पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई गई।
समापन समारोह में बच्चों ने नुक्कड़ नाटक, बाल कवि सम्मेलन, समूह गीत, लोकगीत, झुमैलो आदि प्रस्तुत किए। हम लोग समापन समारोह का संचालन बच्चों से ही कराते हैं। ग्रामीण अंचल के इस विद्यालय में संचालन करने के लिए भी काफी बच्चों का मन था। पांच बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी। कक्षा 8 के शिवांशु रावत की प्रस्तुति पर उसे संचालक बनने के लिए सबसे अधिक वोट प्राप्त हुए। अन्य चार बच्चों को भी अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, विश्ष्टि अतिथि तथा अति विष्श्टि अतिथि बनाकर सम्मान दिया गया।
इस कार्यशाला में संस्था के प्रधानाचार्य आदरणीय श्री वीरसिंह रावत जी व समस्त स्टाफ का सहयोग तो रहा ही श्री जे. के पैन्यूली (कीर्तिनगर), हेमंत चौकियाल (अगस्तमुनि), कालिका प्रसाद सेमवाल (रूद्रप्रयाग), अमृता नौटियाल (तैला सिलगढ़) आदि ने अपने स्कूल से छुट्टी लेकर कार्यशाला के लिए समय निकालकर बच्चों को कई अभिनव प्रयोग कराए। सच में मुझे भी काफी कुछ नया सीखने को मिला। जे.के पैन्यूली जी ने बच्चों को प्राकृतिक रंगों की जानकारी दी। उनसे प्रभावित होकर कक्षा 8 के शिवांशु रावत ने तो अपनी पुस्तक में प्राकृतिक रंगों का बहुत ही सुंदर ढंग से समावेश किया।
इस कार्यशाला में अगस्तमुनि से अजीमप्रेम जी फाउंडेशन के नमोदीप्त बेहरा जी ने भी बच्चों से संवाद किया। उन्होंने मेरे लिऐ प्रस्ताव रखा कि 7 मार्च को रविवार के दिन वे अगस्तमुनि के शिक्षकों के साथ संवाद करना चाहते हैं। 7 मार्च को मुझे अल्मोड़ा लौटना था। उस दिन सायं एक ऑनलाइन कार्यशाला होनी थी। परंतु शिक्षक साथियों से मिलने का मेरा भी मन हुआ। इसलिए मैंने उन्हें सहमति दे दी। 6 मार्च को भारत ज्ञान विज्ञान समिति के साथी भाई गजेंद्र नौटियाल जी की पहल पर राजकीय इंटर कालेज तथा राजकीय कन्या इंटर कालेज अगस्तमुनि में बच्चों के साथ संवाद हुआ। बच्चों को कहानी सुनाई। रात्रि विश्राम अजीमप्रेमजी फाउंडेशन के साथी नमोदीप्त जी के आवास पर हुआ। उनके आवास पर ‘दालमा’ खाने का अवसर मिला। उड़ीसा में कई बार जाने का अवसर मिला।
उड़ीसा का प्रिय पकवान दालमा कई वर्षो बाद खाने का मिला। 7 मार्च को श्री हेमंत चौकियाल, कुसुम भट्ट, गजेंद्र रौतेला, ललिता रौतेला, श्यामलाल भारती, नीलम बिष्ट, राजेंद्र रावत, ज्योति राना आदि लगभग 30 शिक्षक साथियों के साथ संवाद हुआ।
रात को गैरसैण में सेवानिवृत्त शिक्षक तथा बालप्रहरी के आजीवन सदस्य श्री बुटौला जी के आवास पर सलियाणा बैंड पर रूका। सुबह चार बजे उनके आवास से पैदल चल कर बस पकड़ी। लगभग 12 बजे अल्मोड़ा पहुंचा। यहां भारत ज्ञान विज्ञान के जिला सचिव श्री जगदीशचंद्र पाठक की पहल पर राजकीय हाईस्कूल चौराकलेत में आयोजित महिला दिवस के कार्यक्रम में भागीदारी का अवसर मिला। श्री पाठक जी से फोन पर सुबह ही कार्यक्रम निर्धारित हुआ। सायं बच्चों के साथ ऑनलाइन कार्यशाला हुई। पिछली ऑनलाइन कार्यशाला 24 फरवरी को हुई। बहुत दिनों बाद बच्चों से मिलकर नई स्फूर्ति मिली।
