जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने GIS आधारित सरकारी भूमि डाटाबेस निर्माण के निर्देश दिए, आपदा प्रबंधन और योजना निर्माण में आएगी तेजी
‘‘टिहरी लैंड बैंक से होगा पारदर्शी और त्वरित कार्य’’
‘‘सिस्टम को प्रभावी और पारदर्शी बनाएगा लैंडबैंक।’’
📰 टिहरी | 18 जून 2025: टिहरी गढ़वाल की जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने जिला सभागार, नई टिहरी में जिले का लैंड बैंक तैयार करने और उसे अपडेट करने को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सभी तहसीलदारों और पटवारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद सभी सरकारी भूमि और भवनों की जीआईएस (GIS) मैपिंग करें।
जिलाधिकारी ने बताया कि इस प्रणाली के जरिए ओपन लैंड, भू-प्रयोग (land use) और संपत्ति से जुड़ी जानकारी त्वरित गति से प्राप्त की जा सकेगी, जिससे प्रशासनिक निर्णय और विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
GIS और UK-GAMS से जुड़ेंगे सरकारी संसाधन
बैठक में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, देहरादून (U-SAC) के वैज्ञानिकों को निर्देशित किया गया कि वे तहसीलदारों और पटवारियों को UK-GAMS (Uttarakhand Government Asset Management System) पोर्टल पर प्रशिक्षण प्रदान करें, ताकि डाटा एंट्री और भू-मानचित्रण प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जा सके।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में पारदर्शी प्रशासन की पहल
जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के पारदर्शी और उत्तरदायी शासन के विजन के अनुरूप, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) का उपयोग करते हुए जिले के सभी संसाधनों को डिजिटाइज और वर्गीकृत किया जाएगा।
इससे:
- शहरी नियोजन
- आपदा प्रबंधन
- भूमि मूल्यांकन
- संसाधन मानचित्रण
- और प्रशासनिक निर्णयों में तेजी और पारदर्शिता आएगी।
आपदा प्रबंधन और ‘अपणि सरकार’ पोर्टल पर भी चर्चा
बैठक में सभी एसडीएम को आपदा की दृष्टि से आवश्यक सामग्री का आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही नायब तहसीलदार, कानूनगो जैसे रिक्त पदों की जानकारी प्रस्तुत करने और ‘अपणि सरकार’ पोर्टल पर अस्वीकृत आवेदनों का विश्लेषण करने को कहा गया।
बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी
इस बैठक में एडीएम अवधेश कुमार, सभी एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी, जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी कुसुम, जिला सांख्यिकी अधिकारी साक्षी शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
टिहरी लैंड बैंक और GIS आधारित भू-डाटाबेस के माध्यम से जिले में प्रशासनिक कार्यों का डिजिटलीकरण, आपदा प्रबंधन की तत्परता, और नियोजन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। यह पहल भविष्य में राज्य के अन्य जनपदों के लिए भी एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकती है।
