स्व. श्रीमती शशिबाला चौहान जी की पहली पुण्यतिथि पर हृदय से श्रद्धासुमन अर्पित
🌸 विनम्र श्रद्धांजलि 🌸
स्वर्गीय श्रीमती शशिबाला चौहान जी, प्रथम महिला प्रधान, ग्राम पंचायत छाती की पहली पुण्यतिथि पर हृदय से श्रद्धासुमन अर्पित। उनकी स्मृति आज भी हमारे विचारों, भावनाओं और आत्मा के गहराइयों में जीवंत है। इस अवसर पर श्री केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’ जी के प्रति मेरी संवेदनाएं और सहानुभूति।
📜 कवि: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
इस क्षण में, मेरी एक कविता बरबस स्मृति में उभर आई —
✍️ “भाव लोक के विह्वल पक्षी”
(एक श्रद्धांजलिपरक कविता)
भाव लोक के विह्वल पक्षी, क्यों विकलता भरता है?
संघर्षों से ऊब चुका या, नव सृजन कुछ करता है?
इस विराट विश्व का कोना-कोना, निहार लिया है तूने,
जब ब्रह्मांड की बारी आई, क्यों कृपणता सहता है?
नील नलय में उड़ने वाले, क्यों धरती की बात करें?
समदृष्टा समरसता वाले, क्यों अब हृदय अधीर करें?
तुमने गीत मधुर थे गाए, क्यों किसी को कर्कश लगे?
जीवन के अंतिम पड़ाव पर, कैसे अब नव नीड़ मिले?
तू उड़ता था अंतरिक्ष को, सैर करता था सागर की,
हिमालय की उत्तुंग शिखर से निहारता था माटी को।
तूने देखा पारिजात को, तूने देखा नित नरगिस को,
कर्मों का आलिंगन करके, थाम लिया था मर्मों को।
तेरी पीड़ा को लोगों ने, समय-समय पर गीत कहा,
तेरे क्रंदन को लोगों ने, मधुर गीत का नाम दिया।
जन्म दिया, पाला बच्चों को – वह उड़कर के चले गए,
कुछ अंबर में, कुछ सागर में, जाने ना कहाँ चले गए!
जिससे कसमें खाई थी, साथ निभाना दूर रहा,
बीच मार्ग में मीत खो गया, अब हम किससे बात करें?
ऐ खग! ज़्यादा सोच न अब, राग पुराना गा ले,
यादों में खो जाने से भी, मन निर्मल हो जाए।
हम गीतों के ही मीत हैं, क्यों विकल वेदना सहता है?
गीत पुराना गा ले थोड़ा, क्यों निर्झर बनकर झरता है?
भाव लोक के विह्वल पक्षी, क्यों विकलता भरता है?
संघर्षों से ऊब चुका या, नव सृजन कुछ करता है?
📜 कवि: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
📍 सुमन कॉलोनी, चंबा, टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड)
📞 94111 86530
