श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों ने एआई टूल्स, MOOCs डिज़ाइन और डिजिटल शिक्षण की नई संभावनाओं पर साझा किए व्यावहारिक दृष्टिकोण
ऋषिकेश, 16 अगस्त 2025:
श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के फ़ैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर (FDC) द्वारा आयोजित सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम “AI and MOOCs: Redefining Digital Pedagogy for the Future of Learning” का आज भव्य समापन हुआ। इस एक सप्ताहीय कार्यक्रम ने उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार और भविष्य-उन्मुख शिक्षण–अधिगम की नई संभावनाओं को रेखांकित किया।
अंतिम दिवस के सत्र
- डॉ. के. थियागु (सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कर्नाटक):
“AI Tools for Education” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि एआई-आधारित टूल्स शिक्षकों को सामग्री निर्माण, मूल्यांकन और छात्रों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार अधिगम अनुभव को अनुकूल बनाने में मदद करते हैं। चैटबॉट्स, इंटेलिजेंट ट्यूटरिंग सिस्टम और एआई मूल्यांकन प्रणाली के उदाहरणों से उन्होंने प्रतिभागियों को अवगत कराया।इसके बाद उन्होंने “Learner Centered Content Development” विषय पर सत्र लिया। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक शिक्षा शिक्षार्थी-केंद्रित होनी चाहिए। इंटरैक्टिव वीडियो, क्विज़ और केस स्टडी जैसी तकनीकों से अधिगम को अधिक आकर्षक व प्रभावी बनाने के उपाय साझा किए। - डॉ. निराधर (IGNOU, नई दिल्ली):
लंच ब्रेक के बाद उन्होंने “Structuring Online Module for MOOCs” पर चर्चा की। उन्होंने कंटेंट सीक्वेंसिंग, लर्निंग आउटकम्स, असेसमेंट पैटर्न और डिजिटल टूल्स के समन्वय की महत्ता पर प्रकाश डाला।अंतिम तकनीकी सत्र में उन्होंने “Exploring MOOCs Design through SWAYAM” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने SWAYAM प्लेटफ़ॉर्म के कोर्सेज़, उनकी संरचना और पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी दी तथा इसे गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की लोकतांत्रिक पहुँच का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
समापन सत्र
समापन अवसर पर डीन, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एवं प्रभारी कैंपस निदेशक ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शोधार्थियों को वैश्विक डिजिटल शिक्षा मानकों से जोड़ते हैं।
डीन, फैकल्टी ऑफ साइंस, प्रो. एस.पी. सती ने कहा कि एआई और MOOCs जैसे डिजिटल साधन शिक्षा की पहुँच को व्यापक बनाने के साथ-साथ अनुसंधान में भी नए अवसर उत्पन्न कर रहे हैं।
कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रो. अटल बिहारी त्रिपाठी ने सात दिवसीय FDP की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि प्रतिभागियों ने सक्रिय प्रश्नोत्तर और चर्चाओं से कार्यक्रम को सार्थक बनाया।
फ़ैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर की निदेशक प्रो. अनीता तोमर ने कहा कि यह FDP सभी प्रतिभागियों के लिए नए विचारों की खोज, अनुभव साझा करने और डिजिटल शिक्षण पद्धतियों पर गहन विमर्श का सशक्त मंच साबित हुआ। उन्होंने कहा कि यह अनुभव शिक्षण, अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।
समापन सत्र में कुलपति, डीनगण, अधिकारीगण, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और प्रतिभागी उपस्थित रहे।
