होमस्टे योजना, सांस्कृतिक धरोहर और युवाओं के रोजगार पर केंद्रित फिल्म, ग्रामीणों की भारी भागीदारी
स्थान व दिनांक:
गजा/टिहरी, 08 सितंबर 2025।
पलायन की संवेदनशील कहानी पर केंद्रित
गढ़वाली फीचर फिल्म “रैबासी” के शाॅट आज गजा क्षेत्र के निकट ग्राम ग्यूगी (कृदवालगांव) में फिल्माए गए। फिल्म का कथानक उत्तराखंड की सबसे बड़ी सामाजिक समस्या पलायन पर केंद्रित है, जिसमें यह दिखाया गया कि सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त एक व्यक्ति शहर से वापस गांव लौटता है और अपनी संस्कृति व धरोहर को बचाए रखने के साथ-साथ होमस्टे योजना के माध्यम से युवाओं को रोजगार देने का सपना देखता है।
फिल्म का मार्मिक मोड़
कहानी में जहां एक ओर होमस्टे की शुरुआत से गांव के भविष्य की असीम संभावनाओं की झलक मिलती है, वहीं दूसरी ओर परिवार का बेटा शराब की लत का शिकार हो जाता है। इस कठिन परिस्थिति में भाई का बेटा हिम्मत बंधाता है और सहयोग का भरोसा देता है। यह मार्मिक दृश्य दर्शाता है कि चुनौतियों के बावजूद गांव में विकास और उम्मीद की किरण कायम रह सकती है।
होमस्टे और नैसर्गिक सौंदर्य
फिल्माए गए शाॅट में डांडी कांठी होमस्टे की शुरुआत दिखाई गई है, जहां मालिक भविष्य की संभावनाओं पर विचार करता है। उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, हरे-भरे जंगल और पहाड़ी शैली (तिबार) में बने मकानों को दिखाया गया है, ताकि दर्शकों को यह संदेश मिल सके कि असली सुकून गांव की वादियों में है, न कि शहरों की भीड़भाड़ में।
कलाकारों का अभिनय
आज फिल्माए गए दृश्यों में पतरौल राम प्रसाद और उनके बेटे की भूमिका निभा रहे लखू का अभिनय सराहनीय रहा। वहीं गुड्डू के किरदार को भी दर्शकों ने खूब सराहा।
फिल्म से जुड़ी टीम और ग्रामीणों की भागीदारी
इस मौके पर निर्माता बिक्रम सिंह नेगी, प्रोडक्शन मैनेजर प्रेमा नेगी, निर्देशक राजेन्द्र नेगी के साथ राजेश नौगाई, बृजमोहन वेदवाल, पंकज कंडारी, पवन कुमार, मनोज सती, पवन चौबे, बालाजी, सागर शर्मा, प्रशांत, संदीप छिलबट उपस्थित रहे।
सामाजिक कार्यकर्ता मदन सिंह खडवाल, त्रिलोक सिंह, दिनेश प्रसाद उनियाल, बुद्धि सिंह सौंटियाल, श्रीमती रुकमा देवी सहित ग्राम ग्यूगी, कृदवालगांव, खडवालगांव के महिला-पुरुष बड़ी संख्या में शाॅट में शामिल हुए।
*Report: D.P.Uniyal, Gaja
📌 फिल्म “रैबासी” उत्तराखंड की ज्वलंत समस्या पलायन को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत कर रही है। यह न सिर्फ दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ेगी, बल्कि उन्हें गांव, संस्कृति और परंपराओं की ओर लौटने का संदेश भी देगी।
