उत्तराखंड में पहली बार लेजर वॉल और डिजिटल चिंगारियों के साथ लक्ष्मण–रेखा, आकाश में रावण–जटायु युद्ध और पुष्पक विमान का अद्भुत दृश्य
देहरादून, 28 सितंबर 2025।
श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून द्वारा आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव 2025 का छठा दिवस शानदार लीला और अत्याधुनिक तकनीक के मिश्रण से यादगार बन गया। इस दिन रामलीला में शूर्पनखा लीला और सीता हरण का भव्य मंचन हुआ।
मंच पर उड़ने वाले “पुष्पक विमान” में सीता हरण का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद आकाश में रावण और जटायु के बीच लेजर तकनीक द्वारा भव्य युद्ध का दृश्य दिखाया गया। मंच पर लक्ष्मण–रेखा और डिजिटल चिंगारियों की अद्भुत प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कृत्रिम बादलों और डिजिटल जंगल के बीच सीता हरण का दृश्य अद्वितीय रूप में उभरा। शूर्पनखा लीला में शूर्पनखा के नृत्य पर दर्शक झूम उठे और पूरे पंडाल में तालियों की गड़गड़ाहट गूँजी।
श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952 के अध्यक्ष अभिनव थापर ने बताया कि उत्तराखंड में पहली बार लेजर वॉल और डिजिटल चिंगारियों के साथ लक्ष्मण–रेखा का दृश्य प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से रामलीला के मंचन को और भी जीवंत, रोमांचक और ऐतिहासिक रूप से प्रभावशाली बनाया गया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे:
- श्री गंगा सभा हरिद्वार अध्यक्ष नितिन गौतम
- टपकेश्वर महादेव मंदिर महंत 108 श्री कृष्ण गिरी जी
- शत्रुघ्न मंदिर महंत मनोज द्विवेदी
- समाजसेवी दिनेश चमोली, शैलेश गौतम
- हजारा मुल्तानी बिरादरी 1950 अध्यक्ष पवन चंडोक
- रामलीला समिति के सदस्य अमित पंत, गिरीश पैन्यूली, दुर्गा भट्ट, अजय पैन्यूली, डॉ. नितिन डंगवाल, नीता बहुगुणा, शशि पैन्यूली
उत्तराखंड की प्राचीन और गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी पुरानी टिहरी की रामलीला को टिहरी जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित किया गया। 2024 में आयोजित रामलीला को विभिन्न माध्यमों से 55 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा।
इस वर्ष 2025 में Digital Live Telecast System के माध्यम से रामलीला का प्रसारण किया जा रहा है, जिसे 75 लाख से अधिक दर्शक देखेंगे। रामलीला महोत्सव में न केवल भव्य मंचन बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का समागम भी शामिल है। इसमें भजन संध्या, पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम, भव्य मेला, कलश यात्रा और 2 अक्टूबर को रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पारंपरिक पुतला दहन का आयोजन किया जाएगा।
रामलीला महोत्सव 2025, आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय संगम बनकर उत्तराखंड और गढ़वाल की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बन रहा है।
