कोर्ट तिराहे के जूस विक्रेता की घिनौनी हरकत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के पदाधिकारी की शिकायत पर संज्ञान
📰 देहरादून में शर्मनाक घटना
देहरादून, 6 दिसंबर 2025।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक बेहद शर्मनाक, चिंताजनक और जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला सामने आया है। SSP कार्यालय के ठीक बाहर कोर्ट तिराहे के पास जूस बेचने वाले एक युवक द्वारा एक ही कपड़े से अपने प्राइवेट पार्ट साफ करने और उसी कपड़े से जूस के बर्तन पोंछने की घिनौनी हरकत का वीडियो/प्रत्यक्षदर्शी सामने आने के बाद हड़कंप मच गया।
इस मामले में राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के RTI एवं मानवाधिकार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार लक्ष्मी ने इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
⚠️ 04 अक्टूबर 2025 की है पूरी घटना
शिकायत के अनुसार, 4 अक्टूबर 2025 को कोर्ट तिराहे पर जूस की रेहड़ी लगाने वाले बिलावल नामक युवक को एक युवती ने अपनी आंखों से यह शर्मनाक कृत्य करते हुए देखा।
युवक ने पहले अपने प्राइवेट पार्ट को उसी कपड़े से साफ किया और फिर उसी कपड़े से जूस बनाने और परोसने वाले बर्तनों को साफ करता रहा।
यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। यह महज अश्लीलता ही नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ था।
🚨 आरोपी का तर्क और पुलिस की प्राथमिक कार्रवाई
घटना का वीडियो/सूचना मिलते ही शहर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस ने बताया कि आरोपी युवक ने सफाई में कहा कि—
“मेरे पेट के निचले हिस्से में फुंसी थी, इसलिए मैंने ऐसा किया।”
हालांकि यह सफाई किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं मानी गई। पुलिस ने—
✅ जूस की रेहड़ी को सीज किया
✅ आरोपी का चालान काटा
✅ भविष्य में दोबारा रेहड़ी न लगाने की चेतावनी दी
✅ और उसे मौके से छोड़ दिया
यहीं से इस पूरे मामले पर सवाल उठने लगे कि क्या यह कार्रवाई जनस्वास्थ्य जैसे गंभीर अपराध के लिए पर्याप्त थी?
🧑⚖️ मानवाधिकार आयोग में पहुंचा मामला
इस ढीली कार्रवाई से असंतुष्ट होकर भूपेंद्र कुमार लक्ष्मी ने इसे मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि—
यह घटना सैकड़ों लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा थी
इससे संक्रामक बीमारियां फैलने की पूरी संभावना थी
केवल चालान करना कानून के साथ मज़ाक है पुलिस को कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज करना चाहिए था
⚖️ IPS राम सिंह मीना ने लिया संज्ञान
मानवाधिकार आयोग के सदस्य IPS राम सिंह मीना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया और SSP देहरादून को विधि अनुसार सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
आदेश में साफ कहा गया कि—
“यह मामला सीधे तौर पर आम नागरिकों के स्वास्थ्य और मानवाधिकारों से जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में पुलिस को कठोरतम कार्रवाई करनी चाहिए।”
👁️ अब देहरादून पुलिस की भूमिका पर सबकी नजर
अब पूरे शहर और प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि SSP देहरादून इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करते हैं।
लोगों में भारी रोष है कि—
यदि यह घटना SSP ऑफिस के सामने हो सकती है, तो शहर के अन्य इलाकों में स्थिति कितनी भयावह होगी!
🗣️ भूपेंद्र कुमार लक्ष्मी का बड़ा बयान
भूपेंद्र कुमार लक्ष्मी ने कहा—
“यह सिर्फ एक व्यक्ति की गंदी हरकत नहीं, बल्कि पूरे समाज की सार्वजनिक स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर चोट है। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ऐसे हर मामले में जनता के साथ खड़ी रहेगी।”
उन्होंने मांग की कि—
✅ आरोपी पर कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज हो
✅ ऐसे सभी अवैध और अस्वच्छ ठेलों की जांच हो
✅ नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस का संयुक्त अभियान चले
🦠 सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों से—
हेपेटाइटिस A, टाइफाइड, फूड पॉइजनिंग
त्वचा रोग, पेट संक्रमण
और जानलेवा बैक्टीरिया संक्रमण
फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह सीधा जैविक अपराध (Biological Hazard) की श्रेणी में आता है।
✅ निष्कर्ष
यह मामला केवल एक जूस विक्रेता की गंदी हरकत का नहीं, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही, सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों की रक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह होगा कि मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के बाद देहरादून पुलिस किस स्तर की कार्रवाई करती है।
