शहीद हवलदार रविन्द्र सिंह
मातृभूमि की रक्षा करते हुए 18 जनवरी 2026 को दी सर्वोच्च आहुति, 20 जनवरी को पैतृक गांव आगर दशज्यूला में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
सरहद का साक्षी | रुद्रप्रयाग
जब-जब देश की सीमाओं पर तिरंगा सुरक्षित लहराता है, तब-तब किसी न किसी मां का लाल, किसी पिता का सपना और किसी गांव की उम्मीद अमर हो जाती है। ऐसी ही एक अमर कथा में 15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात हवलदार रविन्द्र सिंह का नाम आज इतिहास में दर्ज हो गया है।
अरुणाचल प्रदेश में देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए 18 जनवरी 2026 को हवलदार रविन्द्र सिंह ने मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। जैसे ही यह दुखद समाचार उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद स्थित उनके पैतृक गांव आगर, दशज्यूला पहुंचा, पूरा क्षेत्र शोक और गर्व के मिले-जुले भाव से स्तब्ध रह गया।
शहीद रविन्द्र सिंह, श्री सतेंद्र सिंह राणा (पूर्व ग्राम प्रधान, ग्राम आगर) के सुपुत्र थे। उनका जीवन अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का जीवंत उदाहरण रहा। सीमाओं पर तैनात रहते हुए उन्होंने कभी अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया और अंततः देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
सेना से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहीद जवान का पार्थिव शरीर 19 जनवरी 2026 की रात्रि में रुद्रप्रयाग आर्मी कैंप लाया गया। इसके पश्चात 20 जनवरी 2026 को प्रातः 7:00 बजे, पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन हेतु उनके पैतृक गांव आगर, दशज्यूला लाया जाएगा।
अंतिम संस्कार रुद्रप्रयाग संगम पर सैन्य परंपराओं और सम्मान के साथ संपन्न किया जाएगा। इस अवसर पर सेना के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहेंगे। पूरा जनपद अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देगा, आंखों में आंसू और हृदय में गर्व के साथ।
उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के साथ-साथ वीरों की भूमि कहा जाता है, ने एक बार फिर साबित किया है कि यहां के सपूत देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने से कभी पीछे नहीं हटते। हवलदार रविन्द्र सिंह का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोकसंतप्त परिवार को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें।
शहीद हवलदार रविन्द्र सिंह अमर रहें।
जय हिन्द।
