हर्बल टी से आत्मनिर्भर बनीं प्रियंका बिष्ट, बनीं 'लखपति दीदी' की प्रेरक मिसाल
थौलधार की महिला उद्यमी ने हर्बल टी व्यवसाय से बदली अपनी तकदीर, 20 से अधिक महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ा
टिहरी गढ़वाल, 11 जुलाई 2026 | SKS News।
टिहरी गढ़वाल जनपद के विकासखंड थौलधार के धरवाल गांव की रहने वाली प्रियंका बिष्ट ने अपनी मेहनत, लगन और सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ उठाकर आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। कभी घर, खेती और पशुपालन तक सीमित रहने वाली प्रियंका आज सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनके हर्बल टी व्यवसाय ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि वे क्षेत्र की अनेक महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
स्वयं सहायता समूह से मिली सफलता की नई राह
प्रियंका बिष्ट का जीवन वर्ष 2024 में उस समय नई दिशा में आगे बढ़ा, जब वे ‘वेदावी स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ीं। समूह की नियमित बैठकों में उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी मिली। इसी दौरान उन्होंने स्थानीय संसाधनों पर आधारित हर्बल टी निर्माण को अपने व्यवसाय के रूप में अपनाने का निर्णय लिया।
सरकारी योजनाओं ने बदली जिंदगी
व्यवसाय की शुरुआत के लिए प्रियंका को स्वयं सहायता समूह तथा उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। रिवॉल्विंग फंड (RF), सामुदायिक निवेश निधि (CIF) तथा बैंक ऋण की मदद से उन्होंने अपना उद्यम स्थापित किया।
शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। निरंतर मेहनत, गुणवत्ता और आधुनिक सोच के बल पर उनका व्यवसाय लगातार आगे बढ़ता गया।
6.40 लाख रुपये वार्षिक आय, 800 किलोग्राम हर्बल टी का उत्पादन
आज प्रियंका बिष्ट का हर्बल टी उद्यम सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्तमान में उनका उद्यम प्रतिवर्ष लगभग 800 किलोग्राम हर्बल टी का उत्पादन कर रहा है तथा उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 6.40 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
इस आर्थिक सफलता से उनके परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत हुई हैं।
‘हर्बल टी वाली दीदी’ और ‘लखपति दीदी’ के नाम से मिली नई पहचान
प्रियंका की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रही। आज वे अपने क्षेत्र में “हर्बल टी वाली दीदी” और “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।
उन्होंने अब तक 20 से अधिक महिलाओं को हर्बल टी निर्माण का प्रशिक्षण देकर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उनकी पहल से कई ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण
प्रियंका बिष्ट की सफलता यह साबित करती है कि स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे महिलाओं को आत्मविश्वास, सम्मान, नेतृत्व क्षमता और नई पहचान भी प्रदान करती हैं।
सरकार महिलाओं को बना रही आत्मनिर्भर : डीआरडीए परियोजना निदेशक
डीआरडीए परियोजना निदेशक ज्योति ने कहा कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाकर महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रियंका बिष्ट जैसी सफल महिलाएं इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण हैं कि यदि सरकारी योजनाओं का सही लाभ लिया जाए तो जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है। उन्होंने जनपद की सभी महिलाओं से सरकार की विभिन्न आजीविका योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि जिला प्रशासन प्रत्येक इच्छुक महिला को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी प्रियंका
प्रियंका बिष्ट की संघर्ष से सफलता तक की यह यात्रा उत्तराखंड की हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश है। यह कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कोई भी महिला आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।
