विद्वानों की काशी साबली में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ, आचार्य महावीर प्रसाद उनियाल का 1000वां भागवत कथावाचन बना ऐतिहासिक क्षण
स्वर्गीय गिरिजा प्रसाद बहुगुणा की स्मृति में आयोजित कथा यज्ञ में उमड़े श्रद्धालु, 56 वर्षों से निरंतर भागवत कथा का वाचन कर रहे हैं आचार्य महावीर प्रसाद उनियाल
साबली (टिहरी गढ़वाल), 16 जुलाई 2026 | SKS News
रिपोर्ट: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
टिहरी गढ़वाल के विद्वानों की काशी के रूप में विख्यात साबली ग्राम इन दिनों आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर है। यहां प्रकांड विद्वान, आदर्श शिक्षक एवं कर्मकांडी आचार्य स्वर्गीय पं. गिरिजा प्रसाद बहुगुणा के एकोदिष्ट श्राद्ध के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हो रहा है।
इस आयोजन का सबसे विशेष आकर्षण यह है कि वयोवृद्ध विद्वान आचार्य पं. महावीर प्रसाद उनियाल अपनी 1000वीं श्रीमद्भागवत कथा का वाचन कर रहे हैं। लगभग 56 वर्षों से निरंतर श्रीमद्भागवत कथा का प्रवचन कर रहे आचार्य महावीर प्रसाद उनियाल का यह आध्यात्मिक सफर सनातन परंपरा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
आदर्श शिक्षक और प्रकांड विद्वान थे गिरिजा प्रसाद बहुगुणा
स्वर्गीय पं. गिरिजा प्रसाद बहुगुणा केवल एक आदर्श शिक्षक ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के कर्मकांडी, विद्वान एवं भाषा-साहित्य के मर्मज्ञ भी थे। उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं और सेवानिवृत्ति के बाद भी धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे।
90 वर्ष से अधिक आयु तक समाज को दिशा देने वाले स्वर्गीय बहुगुणा का गत वर्ष निधन हो गया था। उनकी पावन स्मृति में उनके पुत्र राकेश प्रसाद बहुगुणा एवं शांति प्रसाद बहुगुणा द्वारा इस भव्य श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
1000वीं कथा बना आध्यात्मिक इतिहास
व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य महावीर प्रसाद उनियाल अपने ज्ञान, शास्त्रसम्मत व्याख्या और अनुशासित कथावाचन शैली के लिए विख्यात हैं। उनके श्रीमुख से निकलने वाली कथा केवल धार्मिक प्रसंगों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन मूल्यों, नैतिकता और सनातन संस्कृति का भी गहन संदेश देती है।
आयोजकों एवं श्रद्धालुओं के अनुसार यह आचार्य महावीर प्रसाद उनियाल का 1000वां भागवत कथावाचन है, जो अपने आप में एक दुर्लभ उपलब्धि है और सनातन परंपरा के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
पंचम दिवस भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन
ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस आचार्य महावीर प्रसाद उनियाल ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा, गोपी प्रेम, अक्रूर प्रसंग, यमुना स्नान, भगवान नारायण के दिव्य स्वरूप के दर्शन तथा कंस वध जैसे प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं शास्त्रसम्मत वर्णन किया।
श्रद्धालु कथा का रसपान करते हुए भक्ति एवं आध्यात्मिक भाव से सराबोर दिखाई दिए।
अंतिम दिवस होगा समापन
आयोजकों ने बताया कि आगामी दिवस श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का समापन होगा। समापन अवसर पर श्रद्धालु व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे तथा ब्रह्मभोज एवं प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया जाएगा।
बड़ी संख्या में पहुंचे विद्वान एवं श्रद्धालु
कथा के पंचम दिवस अनेक विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से हर्षमणि बहुगुणा, सुशील बहुगुणा (नशा विरोधी आंदोलन), जगमोहन सिंह चौहान, सुभाष राणा, सत्येश्वर प्रसाद कोठियाल, जगत राम सेमवाल, राजेंद्र प्रसाद बहुगुणा, राकेश बहुगुणा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
