हरेला महोत्सव पर सुरकंडा धाम में मौल्यार फाउंडेशन का हरित संकल्प, 108 देवदार के पौधों का रोपण
प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश, कार्यशाला आयोजित कर समाजसेवियों का सम्मान; मां सुरकंडा के चरणों में लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
कद्दूखाल/सुरकंडा (टिहरी गढ़वाल) | रिपोर्ट: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ | सरहद का साक्षी, डिजिटल मीडिया
उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला महोत्सव के अवसर पर मौल्यार फाउंडेशन द्वारा प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल करते हुए सुरकंडा मंदिर परिसर के आसपास 108 देवदार के पौधों का रोपण किया गया। वृक्षारोपण के साथ सभी प्रतिभागियों ने पौधों के संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन का सामूहिक संकल्प भी लिया।
देहरादून सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में फाउंडेशन के सदस्य कद्दूखाल पहुंचे और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से सुरकंडा धाम की पहाड़ियों पर देवदार के पौधे रोपित किए। कार्यक्रम का उद्देश्य हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करना रहा।
कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण पर हुआ मंथन
वृक्षारोपण के उपरांत लोक निर्माण विभाग निरीक्षण भवन, कद्दूखाल परिसर में एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनभागीदारी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम में समाज एवं पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को मौल्यार फाउंडेशन की ओर से सम्मानित भी किया गया।
सुमन सज्वाण ने की फाउंडेशन के कार्यों की सराहना
कार्यक्रम का शुभारंभ चंबा ब्लॉक प्रमुख सुमन सज्वाण एवं जिला पंचायत सदस्य गीता डबराल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि सुमन सज्वाण ने कहा कि मौल्यार फाउंडेशन समय-समय पर सामाजिक, रचनात्मक एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पूर्व पुजाल्डी गांव में आयोजित मैती सम्मेलन ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना जगाई और फाउंडेशन को एक अलग पहचान दिलाई।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
फाउंडेशन ने साझा किया अपना उद्देश्य
कार्यक्रम की अध्यक्षता पंकज होल्कर ने की। फाउंडेशन के सदस्यों एवं अतिथियों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया।
फाउंडेशन के संस्थापक विनोद लेखवार (मूल निवासी पुजाल्डी गांव) की प्रेरणा से संचालित संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए फाउंडेशन अध्यक्ष गुड्डी थपलियाल ने संस्था के उद्देश्यों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
सह-संस्थापक अनीता लेखवार, प्रबंधक गोपाल लेखवार तथा सरिता जुयाल सहित अन्य सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा और जनजागरूकता से जुड़े अभियानों की जानकारी साझा की।
कविताओं के माध्यम से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
प्रख्यात साहित्यकार एवं पत्रकार सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ ने अपनी स्वरचित कविताओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का प्रभावशाली संदेश दिया।
उन्होंने “पेड़ों के मसीहा”, “प्रतिबिंब”, “धरा के गीत” तथा “सुरकुट निवासिनी” जैसी प्रकृति एवं हिमालय की पारिस्थितिकी पर आधारित अपनी पुस्तकों की प्रतियां भी उपस्थित जनों को भेंट कीं।
उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल प्रकृति की शोभा नहीं, बल्कि मानव जीवन के आधार हैं। यदि आज वृक्षों का संरक्षण नहीं किया गया, तो भविष्य की पीढ़ियों को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ेगा।
मां सुरकंडा के दर्शन कर लिया आशीर्वाद
कार्यक्रम के समापन पर फाउंडेशन के सदस्यों ने मां सुरकंडा मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और समाज के कल्याण की कामना की।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में अरविंद सज्वाण, सुरकंडा मंदिर के पुजारी रमेश लेखवार, प्रधानाचार्य मनोहरी लाल डबराल, शशि, पूनम, प्रवीण सकलानी, आशीष, आरती नेगी सहित टिहरी जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
- 🌱 हरेला महोत्सव पर सुरकंडा धाम में 108 देवदार के पौधों का रोपण।
- 🌿 मौल्यार फाउंडेशन ने पौधों के संरक्षण का लिया सामूहिक संकल्प।
- 🏞️ पर्यावरण संरक्षण विषय पर कार्यशाला आयोजित।
- 🏅 समाजसेवा एवं प्रकृति संरक्षण में योगदान देने वालों को किया सम्मानित।
- 📚 साहित्यकार सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ ने कविताओं और पुस्तकों के माध्यम से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश।
- 🙏 कार्यक्रम के समापन पर मां सुरकंडा मंदिर में दर्शन कर लिया आशीर्वाद।
