चम्बा और नरेन्द्रनगर में विदेशी शराब की दुकानों पर 10 रुपये तक की अवैध वसूली; बिल मांगने पर नहीं दिया जा रहा बिल, उपभोक्ता ठगा महसूस कर रहे
टिहरी: टिहरी जिले में शराब की दुकानों पर चल रही मनमानी का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। उपभोक्ताओं की शिकायत है कि चम्बा और नरेन्द्रनगर क्षेत्र की कई विदेशी शराब दुकानों पर उपभोक्ताओं से बोतल के निर्धारित मूल्य से 10 रुपये तक अतिरिक्त राशि ली जा रही है। प्रशासन की आंखों के सामने हो रही यह खुली लूट आम जनमानस के भीतर गुस्से और आक्रोश को जन्म दे रही है।
◾ प्रशासनिक नियंत्रण शून्य, दुकानदार बेखौफ
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्साइज विभाग तथा जिला प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की उचित निगरानी न होने का फायदा शराब दुकान संचालक खुलेआम उठा रहे हैं। दुकानदार उपभोक्ताओं से बोतल के ऊपर छपे अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक पैसा वसूलते हैं। विरोध करने पर जवाब मिलता है—“हमें चाय पानी के लिए भी पैसे चाहिए”।
यह कथन उपभोक्ताओं के अधिकारों के साथ सीधा मज़ाक है। दुकानदारों द्वारा ऐसा कहना दर्शाता है कि उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का कोई डर नहीं है। नियम स्पष्ट कहते हैं कि किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क वसूला जाना दंडनीय है, लेकिन धरातल पर स्थिति पूरी तरह उलट दिख रही है।
◾ उपभोक्ताओं को बिल नहीं जारी, डिजिटल भुगतान का स्क्रीनशॉट मौजूद
उपभोक्ताओं ने बताया कि बिल मांगने पर दुकानों में बिल ही जारी नहीं किए जाते। यह न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि टैक्स चोरी का भी गंभीर मामला है।
उपभोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए फोन पे भुगतान के स्क्रीनशॉट में भी अतिरिक्त राशि दर्ज होना सामने आया है, जो यह प्रमाणित करता है कि दुकानदार अपनी मनमानी पर पूरी तरह उतरे हुए हैं।
इन शिकायतों के बाद भी जिला प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। आखिर क्यों दुकानों पर रेट लिस्ट चस्पा नहीं है और बिल जारी नहीं किया जा रहा?
◾ चम्बा व नरेन्द्रनगर की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक
गत दिवस सामने आए मामलों में चम्बा और नरेन्द्रनगर की विदेशी शराब दुकानों के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि यहाँ दुकानदार निर्धारित मूल्य से ऊपर ही शराब बेच रहे हैं। किसी भी उपभोक्ता को वास्तविक MRP पर शराब नहीं दी जाती।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि—
“प्रशासन और एक्साइज विभाग की नज़रें सब पर हैं, लेकिन कार्रवाई कहीं नहीं। दुकानदार बेखौफ हैं क्योंकि उन्हें राजनीतिक और माफियाई संरक्षण प्राप्त है।”
◾ नशामुक्ति के सरकारी दावे खोखले साबित
राज्य सरकार लगातार “नशामुक्त उत्तराखंड” का नारा देकर जनसंचार माध्यमों में करोड़ों खर्च कर रही है। लेकिन वहीं दूसरी ओर शराब माफियाओं के खिलाफ न कार्रवाई, न निगरानी—यह सरकारी दावों की पोल खोल देता है।
यदि सरकार सच में नशा मुक्त समाज के प्रति गंभीर है, तो शराब की दुकानों पर होने वाली इस अवैध वसूली को रोकना उसकी पहली जिम्मेदारी है। लेकिन वर्तमान स्थिति से लगता है कि प्रशासनिक तंत्र स्वयं मूक दर्शक बना हुआ है।
◾ क्या कहता है कानून?
भारतीय उपभोक्ता अधिकार अधिनियम के अनुसार—
- किसी भी उत्पाद के MRP से ऊपर कीमत वसूलना अवैध है।
- उपभोक्ता के कहने पर बिल देना अनिवार्य है।
- अवैध वसूली करने पर दुकान का लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है।
- उपभोक्ता शिकायत पर जिला प्रशासन और एक्साइज विभाग को तुरंत साइट इंस्पेक्शन करना होता है।
लेकिन टिहरी जिले की शराब दुकानों में इन कानूनों को जैसे दरकिनार कर दिया गया है।
◾ जनता का शोषण, शराब माफिया मजबूत
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में शराब माफिया का नेटवर्क बेहद मजबूत है। दुकानदारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रहता है, जिससे वे किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से बच जाते हैं।
लोग असहाय महसूस कर रहे हैं क्योंकि MRP से ऊँचे दामों पर शराब खरीदना उनकी मजबूरी बन गया है। नज़दीकी क्षेत्रों में विकल्प न होने से उपभोक्ता मनमानी कीमतें देने को मजबूर हैं।
◾ जागरूकता की कमी भी बड़ी वजह
शराब दुकानों पर होने वाली अवैध वसूली की एक बड़ी वजह यह भी है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हैं। बहुत से लोग यह जानते ही नहीं कि MRP से ऊपर कीमत देना उनकी मजबूरी नहीं, बल्कि अवैध है।
सरकार और प्रशासन को इस विषय पर जागरूकता अभियान चलाना चाहिए ताकि जनता अपना हक मांग सके और गलत प्रथाओं का विरोध कर सके।
◾ जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
टिहरी जिले के जनप्रतिनिधि—विधायक, ब्लॉक प्रमुख व स्थानीय निकाय प्रतिनिधि—इस विषय पर मौन हैं।
यह चुप्पी यह संकेत देती है कि या तो वे इस मुद्दे से अनजान हैं या फिर जानकर भी अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं।
जनता सवाल पूछ रही है:
“क्या जनप्रतिनिधि जनता की आवाज़ बनेंगे या शराब माफियाओं के दबाव में चुप रहेंगे?”
◾ प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज
नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
- शराब दुकानों की तुरंत जांच की जाए।
- अवैध वसूली की शिकायतों पर कठोर कार्रवाई हो।
- दुकानों पर MRP स्पष्ट रूप से चस्पा किया जाए।
- प्रत्येक खरीद पर बिल देने को अनिवार्य किया जाए।
- एक्साइज विभाग की मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए।
यदि प्रशासन ने शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की, तो मामले के बढ़ने और आंदोलन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
◾ जनता की अपेक्षा—कानून का शासन स्थापित हो
टिहरी की जनता यह चाहती है कि प्रशासनिक तंत्र निष्पक्ष रूप से काम करे और शराब दुकानों पर चल रही इस अवैध वसूली को रोका जाए।
