लाडेसर आश्रम, पक्षी कुंज (चंबा) में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब | प्रसाद रूप में भोजन वितरण, अयोध्या व अन्य प्रदेशों से पहुंचे श्रद्धालु
रिपोर्ट – @ सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
चंबा/पक्षी कुंज, टिहरी गढ़वाल
पक्षी कुंज स्थित लाडेसर आश्रम में आज कल्कि अवतार भगवान लाडेसर जी का वार्षिक राजतिलक उत्सव अत्यंत धार्मिक उत्साह, श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रतिवर्ष 2 दिसंबर को आयोजित होने वाला यह भव्य पर्व इस वर्ष भी हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में दिव्यता और आस्था से परिपूर्ण रहा।
महाराज के प्रकटीकरण, कल्कि अवतार स्वरूप और राजतिलक परंपरा के बारे में विस्तृत जानकारी भक्तजनों को दी गई। कार्यक्रम में सनातन धर्म, विश्वबंधुत्व और दैवी शक्तियों के प्राकट्य पर व्याख्यान प्रस्तुत किए गए, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो उठा।
प्रसाद व भोजन वितरण: गाय के घी, दूध और शुद्ध सामग्री से बना भोग
आश्रम में आए हुए सभी श्रद्धालुओं को शुद्ध गाय के घी से बने लड्डू,
गाजर का हलवा, गाय के दूध से बनी खीर, तथा पूर्ण स्नेह से तैयार किया गया भोजन प्रसादस्वरूप वितरित किया गया। भक्तजन प्रसाद ग्रहण कर भाव-विभोर हो उठे।
लाडेसर महाराज: पुष्कर, राजस्थान से जुड़ी दिव्य परंपरा
कथाओं और मान्यता के अनुसार, पुष्कर (राजस्थान) में कल्कि अवतार भगवान रामदेव के अवतार रूप में लाडेसर महाराज की पुज्य परंपरा मान्य है।
देशभर में उनके कई आश्रम—जैसे बहराइच, बाराबंकी आदि—स्थापित हैं, जहाँ प्रतिवर्ष विशेष अनुष्ठान होते हैं।
चंबा—पक्षी कुंज के समीप स्थित आश्रम में भी 2 दिसंबर को भगवान लाडेसर जी का राजतिलक दिवस धूमधाम से मनाया जाता है।
आश्रम की व्यवस्थापिका मंजू शेखावत का महत्वपूर्ण योगदान
आश्रम की व्यवस्थापिका एवं मुख्य ट्रस्टी मंजू शेखावत जी द्वारा कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्थाओं की देखरेख की गई।
उनकी अगुवाई में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया और सभी धार्मिक व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुईं।
मौके पर हरिद्वार से पवन वर्मा, आश्रम के ट्रस्टी के रूप में समर्पित भाव से सेवा में उपस्थित रहे और आयोजन में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
अयोध्या से आए मनीषियों की उपस्थिति ने बढ़ाई शोभा
उत्सव में अयोध्या से आए अनेक संत-मनीषी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आध्यात्मिक समारोह की शोभा में चार चाँद लगा दिए।
इस अवसर पर साहित्यकार सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ द्वारा अयोध्या से आए अतिथियों को अपनी पुस्तकों का प्रतीक-चिन्ह स्वरूप भेंट किया गया।
सनातन धर्म और आध्यात्मिक सिद्धांतों पर हुई चर्चा
आश्रम की व्यवस्थापिका मंजू शेखावत जी ने
- सदाशिव के स्वरूप,
- लिंग की उत्पत्ति और महिमा,
- विश्व-बंधुत्व,
- तथा मानव धर्म के कर्तव्य
जैसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना पर आधारित है, जो विश्व को जोड़ने की शक्ति रखती है।
गणमान्यों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में सिंगरूप सिंह नेगी, इंद्र सिंह नेगी सहित क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया।
संपूर्ण आयोजन में भक्ति, अनुशासन और सौहार्द का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
