ढोल-दमाऊ की गूंज में निकली भव्य राम बारात, दशरथ-कैकेयी संवाद ने किया भावविभोर
रामलीला महोत्सव का चतुर्थ दिवस ‘सर्वधर्म सद्भाव दिवस’ के रूप में मनाया गया, हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मों के प्रतिनिधियों को किया सम्मानित
देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजीकृत) की ओर से श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में आयोजित ‘भव्य रामलीला महोत्सव-2026’ का चतुर्थ दिवस ‘सर्वधर्म सद्भाव दिवस’ के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दिन की शुरुआत भगवान श्रीराम की भव्य बारात से हुई। ढोल-दमाऊ, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच निकली राम बारात ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और उत्सवमय बना दिया।
इसके बाद डिजिटल दरबार में राजा दशरथ और कैकेयी के संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों के शानदार अभिनय, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक लेजर एवं साउंड शो ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कैकेयी के दो वरदानों के प्रसंग ने भावुक किए दर्शक
रामलीला मंचन में कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से दो वरदान मांगने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसमें भरत के लिए राजगद्दी और भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगने का दृश्य दिखाया गया। इस मार्मिक प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और कलाकारों के अभिनय पर खूब तालियां बजीं।
विधायक लखपत बुटोला ने की समिति के प्रयासों की सराहना
मुख्य अतिथि विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्शों की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून के अध्यक्ष अभिनव थापर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को देहरादून में भव्य स्वरूप में पुनर्जीवित करना सराहनीय पहल है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ समाज में नैतिक मूल्यों, आपसी सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समिति अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का प्रतीक है। ‘सर्वधर्म सद्भाव दिवस’ के माध्यम से समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और एकता का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा को जीवंत रखने के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
सर्वधर्म सद्भाव दिवस पर चारों धर्मों के प्रतिनिधि सम्मानित
महोत्सव में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मों के प्रतिनिधियों की सहभागिता के माध्यम से सामाजिक एकता, आपसी विश्वास और भाईचारे का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं एवं प्रतिनिधियों को समिति की ओर से सम्मानित किया गया।
सम्मानित अतिथियों में पद्मश्री डॉ. आर. के. जैन, पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग; डॉ. महेश कुड़ियाल, अध्यक्ष आईएमए देहरादून; डॉ. संजना नौटियाल; कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रदेश समन्वयक मधुसूदन सुंदरियाल; गुरुद्वारा पटेल नगर के अध्यक्ष हरमिंदर सिंह; गुरुद्वारा रेसकोर्स के अध्यक्ष बलबीर सिंह बन्नी; दून वैली व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज मैसोन एवं संरक्षक सुशील अग्रवाल; हजारा बिरादरी के अध्यक्ष पवन चंदोक, सचिव सचिन विज तथा जावेद आलम शामिल रहे।
समिति के इस आयोजन के माध्यम से सभी धर्मों के प्रति सम्मान, आपसी प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारी, कलाकार, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
1952 से जुड़ी है पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला
समिति के अनुसार, वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में आयोजित होती आ रही ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद वर्ष 2023 में देहरादून में पुनर्जीवित किया गया। समिति का कहना है कि वर्ष 2025 में आयोजित ‘भव्य रामलीला महोत्सव’ को विभिन्न माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा।
इसी उत्साह से प्रेरित होकर इस वर्ष डिजिटल लाइव टेलीकास्ट, आधुनिक लेजर एवं साउंड शो, पारंपरिक रामलीला मंचन और उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संगम के माध्यम से एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
25 अक्टूबर तक चलेगा मेला, 20 को होगा रावण दहन
महोत्सव के अंतर्गत 8 से 25 अक्टूबर तक मेले और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक होगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का भव्य दहन किया जाएगा। वहीं, 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के राजतिलक का आयोजन होगा।
