देहरादून रामलीला महोत्सव में राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान, सीता स्वयंवर के मंचन ने मोहा मन
भव्य रामलीला महोत्सव का तीसरा दिन ‘राज्य आंदोलनकारी सम्मान दिवस’ को समर्पित, डॉ. हरक सिंह रावत ने आंदोलनकारियों के त्याग और बलिदान को किया नमन
देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजी.) की ओर से आयोजित ‘भव्य रामलीला महोत्सव–2026’ का तृतीय दिवस ‘राज्य आंदोलनकारी सम्मान दिवस’ के रूप में मनाया गया। श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों के आंदोलनकारियों और राज्य आंदोलनकारी मंच के पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं उत्तराखंड कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर रामलीला में सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग तथा परशुराम–लक्ष्मण संवाद का भव्य मंचन किया गया। राम–सीता विवाह के प्रसंग में पंडाल में हुई पुष्पवर्षा ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक लेजर एंड साउंड शो ने भी कार्यक्रम को विशेष भव्यता प्रदान की।
सीता स्वयंवर और परशुराम–लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां
महोत्सव के तीसरे दिन रामलीला मंचन के दौरान सीता स्वयंवर का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया गया। स्वयंवर में विभिन्न राजाओं के हास्यपूर्ण अभिनय ने दर्शकों का मनोरंजन किया। इसके बाद भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग किए जाने के दृश्य ने दर्शकों में उत्साह भर दिया।
इसके पश्चात परशुराम–लक्ष्मण संवाद का प्रभावशाली मंचन हुआ। कलाकारों ने सशक्त अभिनय, पारंपरिक संवादों और पौराणिक चौपाइयों के माध्यम से प्रसंग को जीवंत बनाया। राम–सीता विवाह के दौरान मंच से लेकर पूरे पंडाल में पुष्पवर्षा की गई, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। पारंपरिक रामलीला के साथ आधुनिक लेजर एवं साउंड शो के समन्वय ने दर्शकों को आकर्षित किया।
राज्य आंदोलनकारियों का योगदान सदैव स्मरणीय: डॉ. हरक सिंह रावत
मुख्य अतिथि डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों का संघर्ष, त्याग और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के लंबे संघर्ष और समर्पण से उत्तराखंड राज्य का सपना साकार हुआ।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान करना उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। नई पीढ़ी को राज्य निर्माण आंदोलन के इतिहास से परिचित कराना और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने का प्रयास
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण लंबे संघर्ष, जनआंदोलन, त्याग और बलिदान का परिणाम है। राज्य निर्माण के आंदोलन में पूरे प्रदेश के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी योगदान को स्मरण करने और आंदोलनकारियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से महोत्सव के तीसरे दिन को ‘राज्य आंदोलनकारी सम्मान दिवस’ के रूप में समर्पित किया गया।
उन्होंने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है।
अभिनव थापर ने बताया कि वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में आयोजित होती आ रही ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित कर इसकी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। समिति का उद्देश्य पुरानी टिहरी की विरासत, उत्तराखंड के इतिहास, लोक संस्कृति और सनातन परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाना है।
एक करोड़ दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य
समिति अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव को विभिन्न माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। उन्होंने कहा कि दर्शकों से मिले स्नेह और प्रोत्साहन से प्रेरित होकर इस वर्ष महोत्सव को और भव्य स्वरूप दिया गया है।
उनके अनुसार, डिजिटल लाइव टेलीकास्ट, आधुनिक लेजर एंड साउंड शो, पारंपरिक रामलीला मंचन और उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संगम के माध्यम से इस वर्ष एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य आंदोलनकारी मंच ने जताया आभार
राज्य आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान से संभव हुआ। उन्होंने आंदोलनकारियों को सम्मानित करने की पहल को सराहनीय बताते हुए श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952 का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को राज्य आंदोलन के इतिहास और उसके महत्व से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रदेशभर के आंदोलनकारियों और गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान
‘राज्य आंदोलनकारी सम्मान दिवस’ के अवसर पर राज्य आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, देवेंद्र नौडियाल, महामंत्री रामलाल खंडूरी, अमित ओबेरॉय, सत्या पोखरियाल और विजयलक्ष्मी गुसाईं सहित मंच के पदाधिकारियों एवं प्रदेशभर से जुड़े आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में पार्षद कोमल वोहरा, संगीता गुप्ता, डॉ. मंजू त्रिपाठी, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के सचिन जौली, पूर्व पार्षद अनूप कपूर, समिति के पदाधिकारी अमित पंत, गिरीश पैन्यूली, दुर्गा भट्ट, अजय पैन्यूली, डॉ. नितिन डंगवाल, नीता बहुगुणा और शशि पैन्यूली सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, कलाकार और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
25 अक्टूबर तक चलेगा महोत्सव
समिति के अनुसार, 8 से 25 अक्टूबर तक भव्य मेले और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक निर्धारित है। 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा, जबकि 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के राजतिलक का आयोजन होगा।
उल्लेखनीय है कि श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952 द्वारा आयोजित यह महोत्सव पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला परंपरा को देहरादून में जीवंत बनाए रखने के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और राज्य आंदोलन की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है।
