22 वें उत्तराखण्ड़ राज्य स्थापना दिवस पर सभी प्रदेशवासियों, मित्रों, शुभचिन्तकों को बहुत बधाई व शुभकामनायें। इन वर्षों राज्य अनेक उतार चढाव, आपदायें देखी है, जिन पर जन सहयोग से सफलतायें पाई हैं, लेकिन आज के दिन एक कसक हमेशा हर उत्तराखण्डी के मन में रही है, जिन उद्देश्यो को लेकर हम सभी ने अपनी नौकरी, सेवायें दाव पर लगाकर राज्यान्दोलन में शिरकत की, इस दौरान खटिमा, मंसूरी और रामपुर तिराह पर उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार की दमनकारी कार्यवाही में अनेक आन्दोलनकारियों अपने प्राणों की आहुति दी।
[su_highlight background=”#091688″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी @शक्तिमोहन बिजल्वाण[/su_highlight]
क्या यहां की जन भावनाओं का उत्तराखण्ड बन पाया। जब भी हम देखते है, यह राजनेताओं , व्यूरोक्रेटों के गलत निर्णयों के कारण अपने मूल निवास प्रमाण पत्रों से वंचित कर दिये गये, कर्मचारी चयन आयोग, अधिनस्थ कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से अन्य राज्यों के लिये चारागाह बनाया गया, यहां अभ्यर्थी गौण व बाहर के लोगो को महत्व दिया गया। यहां की वन सम्पदा,खनिज सम्पदा का बेहिसाब अवैज्ञानिक तरीके से दोहन, युवाओ का भविष्य ध्याडी के मजदूर के रूप में बना दिया। भू माफियो का बोलबाला बढा, जमीनो की खरीद फरोक्त बढी।
[irp]यहां की शान्तवादियों अपराधियों और अपराधो में बृध्दि हुई, वन क्षेत्रो में असमाजिक तत्वो का अतिक्रमण बढा है। 13 जनपदो और दो कमीश्नरी, एक करोड के इस राज्य में इन बर्षो में 15 से 25 लाख आबादी से बढने से नाले खाले, नदी के किनारों पर अतिक्रमण बढा है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण राजधानी देहरादून है, और 18 व 19 अक्ठूवर 2021 को आई आपदा में नदी, नलो पर बसी अवैध कालोनियां प्रभावित हुई।
पहाडो में आज भी स्वास्थ्य सेवायें बदहाल स्थिति में है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रो की गर्भवती महिलाओ, गम्भीर रोगियो को जीवन से हाथ धोना पडता हैं। अपार वन सम्पदा से युक्त इस राज्य के पहाडी जनपदो में एक भी उद्योग लगाने का प्रयास नहीं हुआ।
[irp]आज के दिन हमारे नीति नियन्ताओं को इस ओर गम्भीरता विचार करना चाहिये, यदि इस दिशा में कोई ठोस नीति नहीं बनती तो आने वाले भविष्य किसी बडे आन्दोलन होने इंकार नहीं किया जा सकता। सावधान?
