Shri Gopal Bahuguna
[su_highlight background=”#0d1fa3″ color=”#fffcfe”]सरहद का साक्षी@गोपाल बहुगुणा[/su_highlight]
जी हां वैसे तो फ्री-फ्री का यह नारा पूरे भारतवर्ष में जोर शोर से चल रहा है लेकिन यहां पर मैं विशेषकर उत्तराखंड की बात कर रहा हूं, मैं उत्तराखंड के निवासियों से कहना चाहता हूं कि जरा इस फिरी फिरी फिरी पर मनन और विचार करना, मेरा अपना सोचना है कि हमें मुफ्त में कुछ भी नहीं चाहिए, क्योंकि इस चालाक राजनीति ने यदि हमें मुफ्त की आदत डाल दी तो हमारे आने वाले 20 साल में, उत्तराखंड के हालात बहुत बुरे होंगे, 20, साल बाद यहां के युवाओं की यह स्थिति होगी कि आगे भी खाई, पीछे भी खाई, और यह खाई फिरी फिरी के औजार से तैयार की जा रही है वोट के लिए, और बाद में भी इस खाई को पाटने के लिए भी फ्री-फ्री के औजार काम करेंगे, आम जनता इन राजनेताओं के नारों पर ही उलझी रहेगी।
उत्तराखंड की जनता को समझना होगा यहां के संसाधनों को इस तरह मुफ्त में बांट देना किसी की बपौती नहीं है, सरकार भी क्या मुफ्त में देती है वह कहीं ना कहीं से हमारी जेब से ही वसूला जाता है, आज उत्तराखंड जिस स्थिति में है उससे उबरने के लिए हमें मेहनत की जरूरत है टेक्नोलॉजी की जरूरत है संसाधनों के उचित प्रयोग करने की जरूरत है, उत्तराखंड के गांव की बात करें तो यहां के युवाओं के पास जो मुख्य संसाधन है वह खेती-बाड़ी होता है, उसमें केंद्र सरकार किसानों की दुगनी आए करने के लिए सकारात्मक काम कर भी रही है लेकिन सरकार हजारों करोड़ खर्च करने के बाद भी उस परिणाम पर नहीं पहुंच सकती है, क्योंकि किसानों की दुगनी आई करने के लिए पहले धरातल पर काम करना होगा, मेरा अपना मानना है और खेत में काम करने वाले किसान का भी यही मानना है कि सरकार कोई भी संसाधन न दे लेकिन बंदरों और जंगली जानवरों से यदि निजात दे दे तो किसान खुद ही अपनी आय दुगनी से ज्यादा कर सकता है, 15 से 20 साल पहले जंगली जानवर ना होने की वजह से लो अपनी खेती बाड़ी पर ज्यादा निर्भर थे, लेकिन इस बीच जंगली जानवरों की संख्या बढ़ने की वजह से गांव में जो खेती बाड़ी है वह आधे से कम रह गई है।
सरकार को चाहिए कि वह फ्री-फ्री के चक्कर में जनता को अपंग न बनाए बल्कि जो सबसे बड़ा काम सरकार को करना है वह यह है कि इन जंगली जानवरों, बंदरों,सुवरो के नियंत्रण के लिए ठोस नीति बनाई जाए, और यह काम सरकारी स्तर पर ही हो सकता है और यदि सरकार इन जानवरों पर नियंत्रण नहीं कर सकती है तो आने वाले समय में न किसान रहेगा न जमीन रहेगी, गांव मोहल्ले में देख लीजिए बंदरों और सुवरों से तंग आकर लोग,अपनी जमीनों को बाहरी व्यक्तियों को बेच रहे हैं। ऐसी स्थिति में अब वर्तमान सरकार को चाहिए कि कम से कम दो-तीन महीनों में इस पर तुरंत विचार कर उसे धरातल पर उतारने का प्रयास करें।
