एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में नवोदय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए चार दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम शुरू
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, एआई और डिजिटल लर्निंग का मिलेगा प्रशिक्षण
कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह बोले— शिक्षक राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी, उनके सतत व्यावसायिक विकास से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
श्रीनगर (गढ़वाल), 3 नवंबर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं राष्ट्रीय नवोदय नेतृत्व संस्थान, नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में जवाहर नवोदय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए चार दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को हुआ। 2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के 46 शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, नवीन तकनीकों और समकालीन शैक्षिक आवश्यकताओं के लिए दक्ष बनाना है।
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर
उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का पारंपरिक शॉल, स्मृति चिह्न और तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर शोधार्थी स्नेहलता ने विश्वविद्यालय के कुलगीत की सांकेतिक भाषा में प्रस्तुति देकर समावेशिता एवं सुलभ शिक्षा का प्रेरक संदेश दिया।
कार्यक्रम की समन्वयक एवं IQAC की उपनिदेशक प्रो. सीमा धवन ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप सतत व्यावसायिक विकास की अवधारणा पर आधारित है। इसमें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF), दक्षता आधारित शिक्षण पद्धतियां, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक (NPST), राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (NMM), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अनुभवात्मक शिक्षण और डिजिटल लर्निंग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं।
शिक्षक विद्यार्थियों में रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करें: प्रो. सुरेखा डंगवाल
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि दून विश्वविद्यालय, देहरादून की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि शिक्षकों का व्यावसायिक विकास, विद्यार्थियों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और संस्थागत अपनत्व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्वपूर्ण आधार हैं। बदलती शैक्षिक परिस्थितियों में शिक्षकों को अपनी शिक्षण पद्धतियों और व्यावसायिक दक्षताओं का निरंतर विकास करना आवश्यक है।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों, स्थानीय संदर्भों और आधुनिक शैक्षिक दृष्टिकोण के समन्वय से दक्ष एवं संवेदनशील शिक्षक तैयार करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल विषयगत ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक चिंतन और नैतिक मूल्यों का विकास करना भी उनका महत्वपूर्ण दायित्व है।
शिक्षक भावी पीढ़ी के विचार और चरित्र के निर्माणकर्ता: कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसे क्षमता संवर्धन कार्यक्रम शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के साथ समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों के लिए विषयगत ज्ञान के साथ तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक कौशल और नवीन शिक्षण तकनीकों की समझ भी आवश्यक है। शिक्षकों को आधुनिक तकनीक एवं नवाचारों को कक्षा-कक्ष तक पहुंचाने के साथ उन्हें विद्यार्थियों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना चाहिए।
कुलपति ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान के संवाहक नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के चरित्र, विचार और सामाजिक चेतना के निर्माणकर्ता भी हैं। राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों ने भी रखे विचार
इस अवसर पर डीन नियुक्ति एवं प्रोन्नति प्रो. एम.एस. पंवार, बिरला परिसर के निदेशक प्रो. एच.बी.एस. चौहान तथा कुलसचिव प्रो. वाई.पी. रैवानी ने भी अपने विचार साझा किए।
प्रो. सुनीता गोदियाल ने विश्वविद्यालय के चौरास स्थित टिहरी परिसर में बीपीएड पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की पहल के लिए कुलपति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। दिल्ली से पहुंचे प्रो. रजनी रंजन सौमित्र का भी विशेष आभार व्यक्त किया गया।
NCF और दक्षता आधारित शिक्षण पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में एससीईआरटी उत्तराखंड के विशेषज्ञ प्रदीप रावत ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF), दक्षता आधारित अधिगम और अधिगम प्रतिफल विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख प्रावधानों, मातृभाषा में शिक्षण, प्रौद्योगिकी के उपयोग, खेल-एकीकृत शिक्षण और विभिन्न विषयों के समेकित दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि दक्षता आधारित शिक्षण विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करता है। उन्होंने सतत आकलन एवं अनुभवात्मक शिक्षण को प्रभावी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली के डॉ. ऋषभ कुमार मिश्रा ने शिक्षक दक्षता एवं शिक्षण शास्त्र विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी कॉलेज की प्रो. रवनीत कौर द्वारा भी शैक्षिक विषयों पर सत्र संचालित किए जा रहे हैं।
चार दिनों तक आधुनिक शिक्षण और डिजिटल तकनीक पर होगा मंथन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनु राही ने किया। उद्घाटन समारोह में प्रो. एम.एम. सेमवाल, प्रो. आर.एस. नेगी, प्रो. गुड्डी बिष्ट, प्रो. वी.आर. पुरोहित, डॉ. शंकर सिंह, डॉ. सुमन लता तिरुवा, डॉ. सपना सेन, डॉ. रमेश राणा, डॉ. सिद्धार्थ लोहानी और डॉ. आलोक सागर गौतम सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं शिक्षाविद् उपस्थित रहे। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके बाद अतिथियों और प्रतिभागियों ने समूह छायाचित्र लिया।
चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को आधुनिक शैक्षिक चुनौतियों, नवाचारों, तकनीकी दक्षताओं और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया जाएगा। साथ ही उनके व्यावसायिक कौशल को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
