[su_button background=”#063f0d” color=”#fffffe” size=”2″ radius=”5″ text_shadow=”0px 0px 0px #000000″]सरहद का साक्षी @कवि: सोमवारी लाल सकलानी, निशांत[/su_button]
जल ही जीवन है अक्सर हम अपनी जुबान पर यह वाक्य हर समय दोहराते रहते हैं। जिंदा रहने के लिए पांच प्राकृतिक तत्वों में जल भी एक है। क्षिति जल, पावक, गगन समीरा, पंचतत्व से बना शरीरा। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है । यद्यपि संसार में दो तिहाई भूभाग पर जल है लेकिन इसका कुछ ही प्रतिशत भाग पीने लायक है। शेष पानी खारा है। जिसका पेयजल के रूप में उपयोग नहीं हो सकता है। फिर भी जीवन उपयोगी अन्य कार्यों में हम इस का उपयोग करते हैं।
स्वच्छता के लिए जल का होना अति आवश्यक है। पुराने जमाने लोग नदी घाटियों ,जल स्रोतों ,समुद्र तटीय भागों में निवास करते थे, जिससे कि जलापूर्ति हो सके। पेयजल के साथ-साथ साफ- सफाई ,कृषि ,पशुपालन, आदि के लिए जल का उपयोग भरपूर हो सके । नदी घाटी की सभ्यताएं बताती हैं कि पानी के कारण ही इनके नजदीक संस्कृति विकसित हुई और जहां जल या नदी नहीं है ,वह क्षेत्र हमेशा संस्कृति विहीन रहे हैं।
जन का प्रवाह असीम है। जनसंख्या वृद्धि के कारण या भौतिक उन्नति के साथ साथ मनुष्य ने प्रत्येक जगह अपने आशियाने बना लिए। ऊंचाई वाले भागों में जहां जल का अभाव है वहां पर भी गांव, कस्बे, नगर बस रहे हैं। यद्यपि उन्हें जल के अभाव में अत्यंत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन्ही शहरों में एक – हमारा चंबा।
चंबा स्वत स्फूर्त नगर है। आसपास के लोगों ने यहां पर बसे। सुविधाजनक स्थान होने के कारण तथा पुरानी टिहरी के अवसान के बाद यहां जनसंख्या का भार बढ़ता गया। सबसे बड़ी परेशानी अब पानी की महसूस हो रही है। नगर पालिका परिषद क्षेत्र बन जाने के कारण स्थान स्थान पर सुलभ शौचालय की व्यवस्था है। लेकिन भरपूर मात्रा में जल आपूर्ति न होने के कारण स्वच्छता मिशन अधूरा है। पुरानी टिहरी के डूब जाने के कारण चंबा में एकाएक जनसंख्या का भार बड़ा और शिक्षा का एक हव बन जाने के कारण यहां पर जनसंख्या वृद्धि हुई। जिला मुख्यालय से नजदीक होने के कारण तथा आवागमन की सुविधाओं के कारण भी जनसंख्या के भार बढ़ता चला जा रहा है।
मूलभूत सुविधाओं की कमी है। पेयजल की व्यवस्था जो 5 -6 हजार लोगों को लाभान्वित करने के लिए बनी थी। आज पांच गुनी जनसंख्या बढ़ जाने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है । जीवन स्तर में सुधार होने के कारण भी जल का उपयोग ज्यादा होने लगा और जिसके कारण आम व्यक्ति से लेकर यात्रियों और आवागमन करने वाले लोगों को पानी की कठिनाई महसूस होती है।
किसी भी समस्या का कोई न कोई निदान अवश्य है। हम हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रह सकते हैं बल्कि कुछ नवाचार हमें करना पड़ता है । नवाचार की इसी श्रंखला में निवासियों के लिए, नागरिकों के लिए मेरे को सुझाव है। जिन पर कि यदि अमल कर सकें तो काफी राहत मिल सकती है।
पेयजल में उपयोग होने वाले पानी के अलावा, बाथरूम के पानी का भी हम पुन इस्तेमाल कर सकते हैं। जिस की निकासी हम छोटे-छोटे चेंबरों में करके जिसका पुन उपयोग कर सकते हैं। वास वेशन और बर्तन धोने वाले सिंक के नीचे हम बड़ा पतीला या बाल्टी लगाकर पानी इकट्ठा करके उसका भी अनेक रूपों में इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसे हम शौच के बाद लैट्रिन की सफाई करने के कार्य में उपयोग कर सकते हैं। क्यारियों फुलवारी हो गमलों या छिड़काव के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं।
वर्षा के पानी का भरपूर उपयोग किया जा सकता है यदि हमारे पास जगह है तो हम टैंक बना कर छत के पानी का भरपूर उपयोग कर सकते हैं। बरसाती पानी को सार्वजनिक शौचालयों के ऊपर छतों पर पतनाला लगा कर संचित करें तथा शौचालय में इस्तेमाल करें। जलाभाव के समय उस पानी को हम नहाने कपड़े धोने पशुओं के लिए प्रयुक्त कर सकते हैं। इस पानी का सबसे अधिक उपयोग हम निर्माण कार्यों में कर सकते हैं तथा किसी भी सार्वजनिक कार्य आदि में सफाई बर्तन धोने आदि के रूप में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं आवश्यकता के समय हम पड़ोसियों को भी इस पानी को उपलब्ध करा सकते हैं।
पानी की समस्या जितनी विकट है ,उससे भी विकट दुरुपयोग करने की है। मानवीय स्वार्थ, लापरवाही के कारण भी पेयजल की समस्या उत्पन्न हो रही है।प्रयुक्त होने वाले पानी का एक बड़ा हैसस हम रिसाइकिल कर सकते है। जिसे हम अपनी स्थिति के अनुरूप इस्तेमाल का सकते हैं। वाहनों की सफाई,मवेशियों की सफाई और कृषि कार्यों में इसे प्रयुक्त कर सकते हैं। हमारे पूर्वजों के द्वारा बरसाती पानी के संरक्षण के लिए चलों का आविष्कार किया गया था। जो की जलाशयों,तालाबों की जननी सिद्ध हुए हैं।
आटा चक्की कीमत हमें समझने चाहिए उसका सदुपयोग करना चाहिए वितरण की समस्या पर भी विचार करना चाहिए, पानी का पुनर संचरण रीसाइक्लिंग का प्रयोग करना चाहिए पानी की बूंद बूंद को बचाना चाहिए तथा अपने जल स्रोतों नदी तालाब को चलो तथा घरेलू पानी को स्वच्छ और उपयोग युक्त बनाने की भरसक कोशिश करनी चाहिए आंशिक रूप से हम इस समस्या का निदान कर सकते हैं।
* (स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर) नगर पालिका परिषद चंबा



