खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्रालय (भारत सरकार) की स्वायत्तशासी संस्था ‘नेहरू युवा केंद्र’ द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत टिहरी गढ़वाल के हाईफीड (रानी चौरी) में सात दिवसीय हैड स्पेयर प्रशिक्षण के छठवें दिन कवि एवं नगर पालिका परिषद चंबा के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर, सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ ने प्रथम सत्र में युवाओं को संबोधित किया।
अपने ढाई घंटे के व्याख्यान में सकलानी ने गंगा स्वच्छता अभियान, नमामि गंगे, स्वच्छता मिशन, गंगा नदी की स्वच्छता और निर्मलता हेतु किए जा रहे प्रयास और युवाओं की भूमिका पर अपनी कविताओं, स्लोगन पोस्टर और पुस्तिकाओं के द्वारा मार्गदर्शन किया।
प्रशिक्षण में सम्मिलित सभी पचास युवाओं ने रुचि पूर्वक व्याख्यान सुना और किए जा रहे हैं प्रयासों का अनुकरण करने के लिए प्रसन्नता जाहिर की।
जल संसाधन मंत्रालय के सहयोग द्वारा संचालित यह सात दिवसीय प्रशिक्षण अनेक जागरूक लोगों के द्वारा संबोधित किया जाता है। कहा कि गंगा जी सहित समस्त नदियों की स्वच्छता आवश्यक है। गंगा की स्वच्छता और निर्मलता भारत की स्वच्छ आत्मा का प्रतीक है। नमामि गंगे मिशन के द्वारा समग्र स्वच्छता के प्रति एक जागरूकता लोगों के मन में आई है। राष्ट्रीय कार्यक्रमों का समुचित आदर किया जाना चाहिए और सम्यक अनुपालन सुनिश्चित होना चाहिए। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने आगाह किया कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों तथा प्रत्येक सामाजिक कार्यक्रमों में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिस तरह हम अपने कर्तव्य, आदतों, क्रियाकलापों,कौशल कार्य आदि को डिजाइन करेंगे, उसी का प्रभाव आने वाली पीढ़ी अनुकरण करेगी।
नगर क्षेत्र चंबा का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में दूसरा और देश में बावनवां स्थान प्राप्त करने वाला या छोटा सा शहर ‘खुले में शौच से मुक्ति’ का एक उदाहरण है। छोटे-छोटे प्रयासों के द्वारा, सभी के सहयोग से सुखद परिणाम प्राप्त हो रहा है।
जल स्रोतों की स्वछता, स्वच्छ जल का समुचित उपयोग, जल संचय और जल का नियोजित प्रबंधन, कूड़ा निस्तारण, एग्रीगेशन, पॉलिथीन और प्लास्टिक का उन्मूलन, भारतीय स्वच्छताअभियान का एक हिस्सा है। हमें अपने राष्ट्रीय नेताओं ,समाज सुधारकों, बुद्धिजीवगयों,वैज्ञानिकों आदि द्वारा किए गए कार्यों का अनुसरण करना चाहिए। उनकी प्रेरणा से अर्जित ज्ञान और अपने अनुभव के द्वारा स्वच्छता के इस महान पहल का हिस्सा बनना चाहिए।
80 के दशक का उदाहरण देते हुए उन्होंने ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट, हरिद्वार के खड़खड़ी घाट, गांव की छोटी -मोटी नदियों, नालों के साथ-साथ 90 के दशक की गंगा और आज की गंगा- यमुना का अंतर भी स्पष्ट किया। कूड़ा कर्टकट,अवशिष्ट पदार्थ, सीवरेज, रोजमर्रा के जीवन में उत्पन्न होने वाला कचरा, फैक्ट्रियों का रासायनिक कचरा आदि का किस प्रकार से हम निस्तारण करें, उन्होंने विस्तार से प्रशिक्षणार्थियों को समझायी।
इस अवसर पर जिला युवा अधिकारी अविनाश कुमार सिंह, जिला युवा परियोजना अधिकारी (नमामि गंगे) अरुण उनियाल तथा 50 सदस्यीय प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। जिला युवा परियोजना अधिकारी के द्वारा मार्गदर्शक सकलानी को सम्मान में प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया।
