छात्रों को राष्ट्रीय गीत की परम्परा, अर्थ एवं सांस्कृतिक महत्ता से कराया अवगत
संविधान दिवस के अवसर पर जय भारत साधु महाविद्यालय हरिद्वार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया तथा उसके महत्व, इतिहास और उपयोगिता पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पार्षद श्री दीपक शर्मा ने छात्रों को बताया कि—
“राष्ट्रीय गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, राष्ट्र-भावना और स्वतंत्रता-संग्राम का प्रेरणास्रोत है। युवाओं को इसके अर्थ और संदेश को आत्मसात करना चाहिए।”
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वाणी भूषण भट्ट ने छात्रों को देश सेवा, कर्तव्य-निष्ठा और राष्ट्रहित में योगदान देने की प्रेरणा देते हुए कहा कि—
“राष्ट्रीय गीत का गायन हमें हमारे आदर्शों, संस्कारों और देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है।”
कार्यक्रम में डॉ. कुलदीप चंद्र पंत ने ‘वंदे मातरम्’ की उत्पत्ति, साहित्यिक सौंदर्य एवं भारत के स्वतंत्रता-आन्दोलन में इसकी भूमिका पर छात्रों को सरल एवं प्रेरक शैली में समझाया।
इस अवसर पर डॉ. दीपशिखा शील, श्री अनंत भट्ट, श्री आकाश ममगाईं, श्री गिरीश गोदियाल, श्री अरविंद जोशी, तथा सुदर्शन, मयंक आदि उपस्थित रहे।
