टिहरी झील विकास प्राधिकरण में नक्शा स्वीकृति की अड़चन दूर करने की मांग, डीएम को सौंपा पत्र
धारा 143 के तहत गैर-कृषि घोषित भूमि पर भी मास्टर प्लान में कृषि भूमि दर्शाए जाने से प्रवासियों और स्वरोजगार योजनाओं को परेशानी का दावा
नई टिहरी, 31 अगस्त 2026। टिहरी झील विकास प्राधिकरण (TADA) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में भवन मानचित्र स्वीकृति से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की मांग उठी है। जिला संयोजक, नमामि गंगे टिहरी एवं भाजपा नेता अक्षत पवन बिजल्वाण ने जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल को पत्र भेजकर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई एवं प्राधिकरण को निर्देशित करने का अनुरोध किया है।
डीएम को भेजे पत्र में उन्होंने कहा है कि जिले के बेरोजगार युवाओं एवं प्रवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए होम स्टे, होटल, कॉमन सर्विस सेंटर सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के लिए टिहरी झील विकास प्राधिकरण के माध्यम से मानचित्र स्वीकृत कराना आवश्यक है।

धारा 143 की भूमि को लेकर सामने आई समस्या
पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण एवं नगर क्षेत्रों में ऐसी कृषि योग्य भूमि, जिसे राजस्व विभाग द्वारा धारा 143 के तहत गैर-कृषि (आवासीय/कमर्शियल) घोषित किया जा चुका है, उससे संबंधित मामलों में भी समस्या सामने आ रही है।
अक्षत पवन बिजल्वाण के अनुसार, प्राधिकरण के मास्टर प्लान में कुछ ऐसी भूमि अब भी कृषि योग्य भूमि के रूप में प्रदर्शित हो रही है। इसके कारण संबंधित भूमि पर प्रस्तावित निर्माण के मानचित्र स्वीकृत कराने में लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने पत्र में कहा है कि इसका प्रभाव विशेष रूप से उन लोगों पर पड़ रहा है, जो स्वरोजगार के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर होम स्टे, होटल अथवा अन्य व्यवसायिक गतिविधियां शुरू करना चाहते हैं।
प्रवासियों और युवाओं के लिए बढ़ सकती है परेशानी
पत्र में इस समस्या को स्वरोजगार और पलायन से भी जोड़ते हुए कहा गया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में युवाओं और प्रवासियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए होम स्टे एवं अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यदि भूमि एवं मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं आती हैं तो इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अक्षत पवन बिजल्वाण ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि राजस्व विभाग की धारा 143 के अंतर्गत गैर-कृषि घोषित की जा चुकी भूमि के मामलों को स्पष्ट रूप से परीक्षण में लेकर संबंधित भूमि के मानचित्र स्वीकृत किए जाने के लिए टिहरी झील विकास प्राधिकरण को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
प्रशासनिक स्तर पर समाधान की उम्मीद
पत्र में इस समस्या के समाधान को प्रवासियों, स्थानीय युवाओं और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। मांग की गई है कि राजस्व अभिलेखों एवं प्राधिकरण के मास्टर प्लान में भूमि की स्थिति के बीच यदि कोई विसंगति है, तो उसका परीक्षण कर आवश्यक सुधार किया जाए, ताकि पात्र लोगों को मानचित्र स्वीकृति में अनावश्यक परेशानी न हो।
अब इस मामले में जिला प्रशासन एवं टिहरी झील विकास प्राधिकरण की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर लोगों की नजर रहेगी।
