[su_button background=”#881c0a” color=”#fffffe” size=”2″ radius=”5″ text_shadow=”0px 0px 0px #000000″]सरहद का साक्षी @महेंद्रपाल सिंह[/su_button]
गदरपुर (उधम सिंह नगर): क्षेत्र में कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के विकास कार्यो की पोल गदरपुर क्षेत्र में हुई पहली बरसात में ही खोल दी है, जहां 70 एमएम बारिश 18 जुलाई की सुबह 6:00 बजे से 19 जुलाई के सुबह 6 घंटे में रिकॉर्ड की गई इस बरसात से किसानों को अवश्य राहत मिली है, लेकिन कई लोगों का जीना भी दुश्वार हो गया है।
कैबिनेट मंत्री विकास कार्यों की जहां बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और लाखों करोड़ों रुपए विकास कार्यों में खर्च होने की बात करते हैं वहीं उनके गृह नगर गदरपुर से मात्र 3 किलोमीटर दूर मोतिया पुर गांव में देर रात हुई बारिश से लोगों के झूलों तक पानी पहुंच गया, जिससे लोगों का भोजन भी नहीं बन पाया; वहीं इस मौके पर कोई भी कर्मचारी अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि पहुंचाना ही भाजपा के युवा कहलाए जाने वाले कार्यकर्ता ना ही कोई कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के साथ फोटो खिंचवा ले जाने वाले छोटे भैया नेता।
स्थानीय लोगों ने उनके गांव में किसी भी योजना का लाभ ना मिलने की बात कही। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि उनके घर में पानी घुस गया है और उनके कच्चे घर हैं ना ही उन्हें उज्वला योजना का लाभ मिला है ना ही अटल आवास अथवा इंदिरा आवास के तहत कोई मकान। मकान तो दूर की बात कहें स्थानीय लोगों ने इस कॉलोनी में नल तक मुहैया न कराने की बात कही है।
तीन दर्जन से अधिक परिवारों में मात्र एक नल लगा है जिसमें पीने योग्य पानी थोड़ी बहुत मात्रा में आता है और पीने के पानी भरने वालों की लंबी लाइनें भाजपा के विकास कार्यों की पोल पहली बरसात में ही खोल दिए।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र कंबोज ने कहा कि इस कॉलोनी में कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है ना ही यहां सड़क है ना ही पानी की कोई व्यवस्था। नालियां तक इस कॉलोनी में नहीं है।
देर रात हुई बरसात के कारण लोगों के घरों में पानी घुस गया है और यहां पर लोग भोजन बनाने से भी वंचित हो चुके हैं। लकड़ियां गीली हो गई हैं और चोरों में पानी भर चुका है 19 जुलाई की सुबह 11:00 बजे तक कोई भी कर्मचारी अधिकारी तहसील अथवा जनप्रतिनिधि यहां पर मौके पर नहीं पहुंचा है। 112 पर भी फोन किया गया, उसमें भी एक पुलिस कॉन्स्टेबल और एक होमगार्ड सिर्फ देख कर चले गए और उन्होंने राजस्व विभाग का मामला बताया है।
वहीं स्थानीय महिला ने बताया कि वह मुर्गी पालन के जरिए अपना रोजगार चलाती हैं और देर रात आई बाढ़ से उनकी 1 दर्जन से अधिक मुर्गियां मर चुकीं हैं, जिससे उनका रोजगार भी प्रभावित हुआ है, वहीं एक अन्य महिला ने बताया कि उनके चूल्हे में पानी भर जाने के कारण उनके घर में आज भोजन भी नहीं बन पाया है और प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली है।
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