आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी ही सबसे बड़ी ताकत, रिस्पॉन्स टाइम कम करना सरकार की प्राथमिकता: मदन कौशिक
नई टिहरी में आयोजित जिला स्तरीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक आपदा प्रबंधन के गुर, डीएम ने मानसून तैयारियों का दिया विस्तृत ब्यौरा
टिहरी गढ़वाल | 18 जुलाई 2026 | सरहद का साक्षी डिजिटल मीडिया
उत्तराखण्ड सरकार के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने कहा कि आपदा आने से पहले की तैयारी ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का विशेष फोकस आपदा के दौरान रिस्पॉन्स टाइम कम करने तथा प्रत्येक विभाग को बेहतर प्रशिक्षण देकर त्वरित राहत एवं बचाव व्यवस्था सुनिश्चित करने पर है।
शनिवार को नई टिहरी स्थित क्रीड़ा सभागार में आयोजित जनपद स्तरीय “आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction)” विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ मंत्री मदन कौशिक, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष ले. कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी (से.नि.) तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव विनोद कुमार सुमन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
25 वर्षों में उत्तराखण्ड ने बनाई आपदा प्रबंधन की मजबूत पहचान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखण्ड ने पिछले 25 वर्षों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि केवल संसाधन जुटा लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसी भी आपदा की स्थिति में किस विभाग को कब और किस क्रम में कार्य करना है, इसकी पूर्व तैयारी और नियमित प्रशिक्षण सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार आपदा प्रबंधन प्रणाली को लगातार आधुनिक बना रही है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य न्यूनतम समय में प्रारंभ किया जा सके।
अब केवल राहत नहीं, पूरे वर्ष चलती है तैयारी
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आज आपदा प्रबंधन विभाग केवल आपदा आने के बाद सक्रिय नहीं होता, बल्कि पूरे वर्ष प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल, जन-जागरूकता अभियान, आधुनिक तकनीक, ‘सचेत’ ऐप, सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक तैयारियां की जाती हैं।
उन्होंने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं अधिकारियों एवं कर्मचारियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करती हैं, जिससे आपदा के समय बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
टिहरी में मानसून से निपटने की पूरी तैयारी
जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए जनपद की तैयारियों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि—
- जनपद में जेसीबी मशीनों की GPS लोकेशन आधारित तैनाती की गई है।
- एसडीआरएफ टीमों को देवप्रयाग एवं कीर्तिनगर में गंगा क्षेत्र के लिए तैनात किया गया है।
- दूरस्थ क्षेत्रों में तीन माह का आवश्यक राशन पहले से उपलब्ध करा दिया गया है।
- टिहरी बांध सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन को लेकर अलग से समीक्षा बैठक कर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं।
विशेषज्ञों ने दिए आधुनिक आपदा प्रबंधन के व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।
- डॉ. पूजा राणा ने ‘सचेत: सुरक्षा का राष्ट्रीय रडार’ एवं एकीकृत संचार प्रणाली पर प्रस्तुति दी।
- डॉ. पी.डी. माथुर ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के वैश्विक फ्रेमवर्क एवं लक्ष्यों की जानकारी दी।
- डॉ. वेदिका एवं रॉबिन अग्रवाल ने Incident Response System (IRS) के प्रभावी संचालन पर प्रशिक्षण दिया।
- रोहित एवं धर्मेन्द्र ने आपदा प्रबंधन पोर्टल एवं मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग की जानकारी साझा की।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, एसएसपी श्वेता चौबे, सीडीओ वरुणा अग्रवाल, एडीएम शैलेंद्र नेगी, जिला आपदा अधिकारी बृजेश भट्ट, सभी एसडीएम, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं पत्रकार उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
✔ आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी को बताया सबसे प्रभावी उपाय।
✔ रिस्पॉन्स टाइम कम करने पर सरकार का विशेष जोर।
✔ नई टिहरी में जिला स्तरीय DRR कार्यशाला आयोजित।
✔ GPS आधारित जेसीबी तैनाती और SDRF की अग्रिम व्यवस्था।
✔ ‘सचेत’ ऐप, सेल ब्रॉडकास्ट और आधुनिक तकनीकों पर प्रशिक्षण।
