उत्तराखंड बजट 2026–27 केवल आंकड़ों का पुलिंदा, जनता की समस्याओं पर चुप्पी : राकेश राणा
पलायन, बेरोजगारी, जंगली जानवरों का आतंक, स्वास्थ्य और टिहरी बांध विस्थापितों के मुद्दों पर ठोस नीति का अभाव
नईटिहरी। उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026–27 का बजट केवल आंकड़ों का बड़ा पुलिंदा है, लेकिन इसमें प्रदेश की वास्तविक समस्याओं का कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता। यह बात सामाजिक कार्यकर्ता राकेश राणा ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि सरकार भले ही इसे प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा बजट बता रही हो, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इसमें पहाड़, किसान, बेरोजगार युवा और आम जनता की पीड़ा कहीं दिखाई नहीं देती।
राकेश राणा ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों के आतंक से किसान और ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं। उनकी मेहनत की फसलें लगातार बर्बाद हो रही हैं, लेकिन इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति आज भी पहाड़ों में बेहद खराब है। अधिकांश अस्पतालों में डॉक्टरों और आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है। इसके बावजूद बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर कोई ठोस और प्रभावी योजना दिखाई नहीं देती।
राकेश राणा ने कहा कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या पलायन है। गांव तेजी से खाली हो रहे हैं और पहाड़ की संस्कृति व अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो रही हैं, लेकिन पलायन रोकने के लिए सरकार के पास कोई ठोस रोडमैप नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को भी इस बजट से काफी उम्मीदें थीं कि रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, लेकिन युवाओं के लिए इसमें कोई नई और ठोस पहल नजर नहीं आती।
उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम आदमी की कमर टूट रही है, लेकिन बजट में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी उपाय दिखाई नहीं देता।
राकेश राणा ने यह भी कहा कि प्रदेश में शिक्षा का क्षेत्र तेजी से बाजारीकरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन सरकार इस पर नियंत्रण करने के बजाय मौन स्वीकृति देती नजर आ रही है।
उन्होंने कहा कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि टिहरी बांध विस्थापितों और प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा को लेकर भी इस बजट में कोई चर्चा नहीं की गई।
इसके साथ ही प्रतापनगर क्षेत्र को केंद्रीय ओबीसी में शामिल करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी सरकार की ओर से कोई पहल नहीं दिखाई दी।
अंत में राकेश राणा ने कहा कि कुल मिलाकर यह बजट जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में पूरी तरह असफल साबित हुआ है। उत्तराखंड की जनता को इससे जो आशाएं थीं, वे इस बजट में पूरी होती दिखाई नहीं देतीं।
