उत्तराखंड में 18 से 22 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में रेड और ऑरेंज चेतावनी जारी
एसईओसी ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए, चारधाम यात्रियों और पर्यटकों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील
देहरादून | 18 जुलाई 2026 | सरहद का साक्षी डिजिटल मीडिया
उत्तराखंड में आगामी दिनों में मौसम के गंभीर मिजाज को देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने सभी जिलाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), देहरादून द्वारा 18 से 22 जुलाई तक राज्य के विभिन्न जनपदों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा, आकाशीय बिजली एवं तेज बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है।
एसईओसी द्वारा जारी निर्देशों में सभी जिलों को संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी, राहत एवं बचाव दलों की तैनाती, जिला आपदा परिचालन केंद्रों को 24×7 सक्रिय रखने तथा भूस्खलन संभावित मार्गों पर आवश्यक मशीनरी उपलब्ध रखने को कहा गया है।
19 जुलाई: तीन जिलों में रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने 19 जुलाई को नैनीताल, चम्पावत और ऊधमसिंह नगर जनपदों में रेड अलर्ट जारी किया है, जहां अत्यंत भारी वर्षा की संभावना है।
वहीं देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा, आकाशीय बिजली और तेज बारिश की संभावना है।
उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा।
20 जुलाई: देहरादून, हरिद्वार और टिहरी में रेड अलर्ट
20 जुलाई को देहरादून, हरिद्वार और टिहरी के कुछ क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। यहां भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। साथ ही देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, टिहरी, उत्तरकाशी और पौड़ी में ऑरेंज अलर्ट प्रभावी रहेगा।
21 और 22 जुलाई का पूर्वानुमान
21 जुलाई को देहरादून और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल, चमोली और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट रहेगा।
22 जुलाई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भारी वर्षा की संभावना के चलते येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने इस दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज वर्षा की संभावना भी व्यक्त की है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने जारी की एडवाइजरी
सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने, राहत एवं बचाव दलों को पूरी तरह तैयार रखने तथा भूस्खलन संभावित मार्गों पर मशीनरी और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने प्रदेशवासियों, चारधाम यात्रियों और पर्यटकों से अपील की कि मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
जनता के लिए महत्वपूर्ण सलाह
मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखें।
अनावश्यक यात्रा से बचें।यात्रा से पहले सड़क और मौसम की जानकारी अवश्य लें।
नदी-नालों, गदेरों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
भूस्खलन संभावित स्थानों पर विशेष सावधानी बरतें।
किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।
आपातकालीन हेल्पलाइन
112 – आपातकालीन सहायता
1070 – राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष
1077 – जिला आपदा नियंत्रण कक्ष

