ग्रामीण भारत के लिए ऐतिहासिक बदलाव: 1 जुलाई 2026 से लागू होगा ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अधिनियम
अब ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी, केंद्र सरकार ने किया ₹95,692 करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन
नई दिल्ली, 11 मई 2026।
ग्रामीण भारत के विकास, रोजगार और आजीविका सुरक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] अधिनियम, 2025” को अधिसूचित कर दिया है। यह नया अधिनियम पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जुलाई 2026 से लागू होगा।
नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही वर्ष 2005 से संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसी तिथि से निरस्त माना जाएगा। केंद्र सरकार ने इसे विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास व्यवस्था में एक बड़ा और परिवर्तनकारी कदम बताया है।
ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिनों के रोजगार की गारंटी
नए अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक होंगे, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। यह व्यवस्था ग्रामीण आय बढ़ाने, रोजगार सुरक्षा मजबूत करने और गांवों में सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
सरकार के अनुसार यदि रोजगार मांगने के बावजूद निर्धारित समय सीमा में काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के पात्र होंगे।
DBT से होगा भुगतान, देरी पर मिलेगा मुआवजा
VB–G RAM G अधिनियम में पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक या डाकघर खातों में किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि भुगतान में देरी होती है तो श्रमिकों को विलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) भी मिलेगा।
ग्रामीण रोजगार के लिए रिकॉर्ड बजट आवंटन
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु ₹95,692.31 करोड़ का ऐतिहासिक बजटीय आवंटन किया है, जो अब तक ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के लिए बजट अनुमान स्तर पर सबसे बड़ा आवंटन माना जा रहा है।
राज्यों के संभावित अंशदान सहित इस कार्यक्रम का कुल अनुमानित व्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक रहने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अवसंरचना निर्माण, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
मनरेगा से नए कानून में होगा निर्बाध ट्रांजिशन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत चल रहे कार्यों और रोजगार पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा। 30 जून 2026 तक चल रहे सभी कार्य नए अधिनियम के तहत सुरक्षित रहेंगे और उन्हें व्यवस्थित तरीके से नई व्यवस्था में समाहित किया जाएगा।
मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड भी तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। जिन श्रमिकों के पास जॉब कार्ड नहीं हैं, वे ग्राम पंचायत स्तर पर आवेदन कर सकेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल ई-केवाईसी लंबित होने के कारण किसी भी पात्र श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा।
ग्रामीण परिवर्तन का नया विजन
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नए अधिनियम के तहत विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं का प्रारूप राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के साथ परामर्श कर तैयार किया जा रहा है। इनमें शिकायत निवारण, मजदूरी भुगतान, प्रशासनिक व्यय, राष्ट्रीय संचालन समिति और संक्रमणकालीन प्रावधानों से जुड़े नियम शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम ग्रामीण भारत में आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
