मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और NRLM से मिला हौंसला, 134 महिलाओं को दिया आत्मनिर्भरता का अवसर
सीमा भण्डारी की सफलता, ग्रामीण महिला उद्यमिता का प्रेरक उदाहरण
✍🏻 रिपोर्ट: सरहद का साक्षी, डिजिटल मीडिया — चम्बा, टिहरी गढ़वाल
राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से आज पहाड़ की महिलाएँ भी अपने गाँव में उद्यम शुरू कर रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रही योजनाएँ ग्रामीण महिलाओं के लिए न केवल रोजगार का साधन बन रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता का मार्ग भी प्रशस्त कर रही हैं।
इसी बदलते परिदृश्य का प्रेरक उदाहरण हैं टिहरी जनपद के चम्बा ब्लॉक के छोटा स्यूटा गाँव की सीमा भण्डारी, जिन्होंने न केवल अपनी पहचान मजबूत की है, बल्कि अपने गाँव की महिलाओं के जीवन में भी नई संभावनाओं का द्वार खोला है।
समूह से शुरुआत — NRLM ने दी प्रशिक्षण और दिशा
2018 में नागराजा स्वयं सहायता समूह बनने के बाद सीमा भण्डारी और उनकी साथी महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ। समूह सुविधा केंद्र के माध्यम से गाँव की महिलाएँ अपने उत्पादों का निर्माण, संग्रहण और विपणन करने लगीं।
2023 में सीमा भण्डारी ने RSETI से मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया और सिर्फ तीन महीनों में लगभग 15,000 रुपये का लाभ कमाया, जिससे उनका आत्मविश्वास दोगुना हो गया।
3K ऑर्गेनिक आउटलेट — पहाड़ी उत्पादों को मिला बाज़ार
कृषि विभाग की 3K आउटलेट योजना के तहत सीमा को रैक, तराजू और उत्पाद प्रदर्शन सामग्री मिली, जिससे उन्होंने अपनी दुकान की शुरुआत की। उनके आउटलेट में स्थानीय पहाड़ी उत्पाद — जैसे राजमा, दाल, कैमोमाइल, अचार, और मशरूम — गुणवत्तापूर्वक बेचे जा रहे हैं।
यह आउटलेट आज सिर्फ व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय उत्पादन और महिला स्वावलंबन का सशक्त मंच है।
5 लाख का ऋण — मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से मिला बड़ा अवसर
सीमा भण्डारी ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से 5 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर स्टोर, उत्पाद संग्रहण केंद्र और आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया। आज उनका यह केंद्र गाँव की महिलाओं को प्रशिक्षण, उत्पाद निर्माण और विपणन का अवसर प्रदान कर रहा है।
5 लाख रुपये का वार्षिक टर्नओवर — आत्मनिर्भरता का मजबूत मॉडल
सीमा भण्डारी आज अपने 3K ऑर्गेनिक आउटलेट के माध्यम से प्रति वर्ष लगभग 5 लाख रुपये का टर्नओवर कर रही हैं। इससे भी बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने गाँव की 134 महिलाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और उद्यमिता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया है।
सीमा भण्डारी का यह मॉडल टिहरी ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की ग्रामीण महिला उद्यमिता के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में देखा जा रहा है।
संदेश: बदलते पहाड़, बदलती महिलाएँ
गाँव की महिलाएँ आज सिर्फ अपने घर तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवसाय, सामुदायिक विपणन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग के माध्यम से अपने समाज का आर्थिक ढांचा मजबूत कर रही हैं। सीमाभण्डारी का प्रयास दर्शाता है कि यदि अवसर मिले, प्रशिक्षण मिले और नीतियाँ सही दिशा में लागू हों, तो पहाड़ की महिलाएँ भी बड़े पैमाने पर उद्यमिता में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
Disclaimer:
इस समाचार में प्रस्तुत तथ्य, उपलब्ध जानकारी एवं स्थानीय स्रोतों पर आधारित हैं। सरहद का साक्षी डिजिटल मीडिया किसी भी सरकारी योजना, ऋण, आय, या दावों की स्वतंत्र पुष्टि या खंडन करने का दावा नहीं करता। इस समाचार का उद्देश्य केवल ग्रामीण सफलता, उद्यमिता और सरकारी योजनाओं से जुड़े सकारात्मक प्रभाव को साझा करना है।

