📰 महिला कांग्रेस ने दिया समर्थन, आशा रावत बोलीं—25 साल बाद भी नहीं मिला अधिकार
नई टिहरी | 19 जनवरी, 2026
केमसारी–पीपली टीन सेड में रह रहे टिहरी बांध विस्थापितों को मालिकाना हक दिलाने की मांग को लेकर संघर्ष समिति का धरना छठवें दिन भी लगातार जारी रहा।
धरना स्थल पर आज महिला कांग्रेस टिहरी की जिला अध्यक्ष आशा रावत अपने समर्थकों के साथ पहुंचीं और विस्थापितों के आंदोलन को खुला समर्थन दिया।
✊ 25 वर्षों से मालिकाना हक का इंतजार
महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष आशा रावत ने कहा कि—
“टिहरी बांध निर्माण के समय पुनर्वास विभाग द्वारा जिन परिवारों को केमसारी–पीपली टीन सेड में विस्थापित किया गया, उन्हें 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी मालिकाना हक नहीं दिया गया।
मालिकाना हक न मिलने के कारण ये लोग अपने आवासों में कोई स्थायी निर्माण तक नहीं कर पा रहे, जिससे उनका जीवन अत्यंत कठिन हो गया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापितों की इस गंभीर समस्या को लेकर जिला प्रशासन और सरकार लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
⚠️ पूर्व आश्वासन पर नहीं हुई कार्रवाई
आशा रावत ने बताया कि पूर्व में आंदोलन को जिला प्रशासन द्वारा यह कहकर समाप्त कराया गया था कि विस्थापितों को मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा, लेकिन आज तक इस आश्वासन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
🏛️ प्रशासन और पुनर्वास विभाग से तत्काल निर्णय की मांग
धरना स्थल पर मौजूद पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सीमा कृषाली,
बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ अध्यक्ष ममता उनियाल,
महिला कांग्रेस उपाध्यक्ष लक्ष्मी रावत ने संयुक्त रूप से कहा कि—
“पुनर्वास विभाग और जिला प्रशासन को केमसारी–पीपली टीन सेड के विस्थापितों को तत्काल मालिकाना हक देना चाहिए।
जब तक प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक हम उनके साथ संघर्ष जारी रखेंगे और इस लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाएंगे।”
📣 संघर्ष समिति ने दोहराई एक सूत्रीय मांग
धरना स्थल पर संघर्ष समिति के सदस्यों ने अपनी एक सूत्रीय मांग को पुनः दोहराते हुए कहा कि—
➡️ प्रशासन को शीघ्र निर्णय लेकर विस्थापितों को मालिकाना हक प्रदान करना चाहिए।
➡️ अब आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
👩👩👧👦 बड़ी संख्या में महिलाएं रहीं उपस्थित
धरना स्थल पर महिला कांग्रेस टिहरी जिलाध्यक्ष आशा रावत की अध्यक्षता में—
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सीमा कृषाली, ममता उनियाल (बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ अध्यक्ष), लक्ष्मी रावत (उपाध्यक्ष, महिला कांग्रेस), सुमिता घई, ममता पैन्यूली, रेनू, महिमा कस्री, अनिता शाह, जमीर अहमद, रविराज, मनीष तोमर, सुरेंद्र खत्री, नजाकत अली, सीताराम सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और विस्थापित परिवार मौजूद रहे।
