पेड़ों को राखी बांध छात्राओं ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
राजकीय इंटर कॉलेज दौंक में अनूठी पहल; नागराजा मंदिर के समीप 27 नक्षत्रों के प्रतीक पौधों से सजाई गई नक्षत्र वाटिका
टिहरी/26 अगस्त 2026। रक्षा बंधन के पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए जौनपुर विकासखंड के राजकीय इंटर कॉलेज दौंक की छात्राओं ने अनूठी पहल की। छात्राओं ने पेड़ों एवं पौधों को राखी बांधकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने पौधों को रक्षा सूत्र बांधने के साथ उन्हें गले लगाया। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि जिस प्रकार रक्षा बंधन पर भाई-बहन एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प लेते हैं, उसी भावना से समाज को प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का भी संकल्प लेना चाहिए।
परंपराओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की जरूरत
कार्यक्रम संयोजक संजय प्रकाश सेमवाल ने कहा कि भारतीय परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना पहले से ही मौजूद है। यदि इन परंपराओं को वर्तमान समय की पर्यावरणीय चुनौतियों के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया जाए, तो इससे पर्यावरण संरक्षण को जनअभियान का स्वरूप दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों से विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी मजबूत होता है।
नागराजा मंदिर के समीप बनाई नक्षत्र वाटिका
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण नागराजा मंदिर के समीप नक्षत्र वाटिका का निर्माण रहा। शिक्षक आशीष सगाई एवं इन्दु सैनी के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं ने यहां 27 नक्षत्रों के प्रतीक स्वरूप विभिन्न प्रजातियों के 27 पौधे लगाए।
नक्षत्र वाटिका में आंवला, बांस, पलाश, बेल, अर्जुन, नींबू सहित विभिन्न पौधों का रोपण किया गया। विद्यार्थियों ने पौधों की देखभाल एवं संरक्षण की जिम्मेदारी लेने का भी संकल्प लिया।
यह पहल विद्यालयी शिक्षा को पर्यावरण, संस्कृति और स्थानीय प्रकृति से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। नक्षत्र वाटिका आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण एवं जैव विविधता को समझने का जीवंत माध्यम भी बन सकती है।
आधुनिक संदर्भ में परंपराओं को अपनाने का संदेश
विद्यालय के प्रधानाचार्य राम औतार ने सभी को रक्षा बंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि परंपराएं तभी अधिक प्रभावी और सार्थक बनती हैं, जब उन्हें समय की आवश्यकताओं और आधुनिक संदर्भों के अनुरूप अपनाया जाए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण समाज की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। यदि विद्यार्थी बचपन से ही पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित करें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
प्रधानाचार्य ने छात्र-छात्राओं की इस पहल की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण के संदेश को विद्यालय और समुदाय तक पहुंचाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में हेड गर्ल स्वाति, प्रियंका, सरस्वती, बबीता, अनिल एवं रंजना सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

