सुयोग्य राजनेता ही नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी जीत लेते हैं जनता का दिल
अपनी कार्य शैली से छोड़ते हैं विशिष्ट छाप
साबित कर दिखाते हैं कि वे हैं विलक्षण प्रतिभा के धनी
टिहरी, कवि : सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’। महापुरुष कारखाने में नहीं बनाए जाते बल्कि वे अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से जनता के दिल पर राज करते हैं। इन्ही मे से एक हैं जिलाधिकारी टिहरी श्री मयूर दीक्षित।
टिहरी जनपद का सौभाग्य रहा है कि यहां समय-समय पर कुशल प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन किया। 90 के दशक में मुहम्मद इफ्तिखारुद्दीन (आई ए एस) ने अपनी विशिष्ट छवि टिहरी जनपद में छोड़ी। जिसका उल्लेख मैने अपनी प्रथम काव्य कृति (दिव्य- शश्रीखंड) मे भी किया था। सबका उल्लेख करना संभव नही है। लम्बी लिस्ट बन जाएगी। पी के मिश्र, सुरेंद्र पांगती, राधा रतूड़ी, दुर्गश जोशी, मंगेश घिल्ड़ियाल आदि की प्रशासनिक सुधार और स्नेह भी जन मानस नही भूल सकता है।
वर्तमान जिलाधिकारी श्रीमान मयूर दीक्षित से प्रत्यक्ष अनेक बार भेंट हुई है। जब मैं अपनी पुस्तक “धरा के गीत” और “प्रतिबिंब” उन्हें भेंट करने उनके कार्यालय में गया तो बहुत अभिभूत हुआ। पिछले साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर पुलिस लाइन चंबा में, मेरे कविता पोस्टर का विमोचन भी उनके कर कमलों से हुआ था। एक साल पूर्व चंबा के टैक्सी पार्किंग के ऊपर से मलबा आया जिसमें कई लोगों की जान गई थी। 1:00 बजे रात तक डीएम साहब स्वयं मौके पर मौजूद रहे जो कि उनकी विशिष्टता का उदाहरण है।
जिस तरह से योग्य शिक्षक की काबिलियत उसके छात्रों के द्वारा आंकी जाती है इसी तरह योग्य प्रशासनिक अधिकारी की काबिलियत लोगों की जुबान से सुनाई देती है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित जी जब से टिहरी के जिलाधिकारी हैं। जिले का प्रत्येक क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान है। उनके कार्यकाल में ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनका आगामी पीढ़ी को भी बड़ा लाभ मिलेगा। टिहरी मेडिकल कालेज की स्वीकृति उनमे एक है। प्रशासनिक क्षमता तो प्रत्येक के अंदर होती है लेकिन कार्य शैली और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा लोगों का प्यार पाना भी बड़ी बात है।
बीते दिवस पूर्व सैनिक संगठन के जिलाध्यक्ष देवसिंह पुंडीर के नेतृत्व में पूर्व सैनिकों का एक प्रतिनिधि मंडल आदरणीय डीएम साहब को मिला। उनकी मांगे जो भी रही हों इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना पूर्व सैनिकों को डीएम साहब के द्वारा किया गया उचित सम्मान मेरी दृष्टि में है। सैनिक टोपी को सम्मान है।
मेरे एक मित्र ने सोशल मीडिया में एक फोटो मुझे शेयर की। डीएम साहब खड़े होकर मांग पत्र को प्राप्त कर रहे हैं और प्रत्येक अफसर पूर्व सैनिकों के सम्मान में अनुशासन से उनके साथ खड़े हैं। सुयोग्य प्रशासक की कार्यप्रणाली, कार्य करने का तरीका, सब कुछ इसी चित्र में बयां हो जाता है। इससे पूर्व भी शौर्य दिवस के अवसर पर पूर्व सैनिकों, भाजपा और कांग्रेस जिलाध्यक्षों ने मंच से डीएम साहब के कार्यो की दिल से सराहना की जो प्रथम बार सुनाई दी। वह एक हकीकत थी।
उन्होंने शौर्य स्मारक को पूर्व सैनिकों की मांग के अनुरूप यथासमय टीन सेड निर्माण पूर्ण करवाया इसके लिए आभार प्रकट किया गया था। जन- प्रतिनिधियों से तालमेल बिठाकर डीएम साहब अपने प्रशासनिक दायित्व का निर्वहन करते हैं। चंबा टैक्सी स्टैंड के ऊपर में टूटे भाग का कार्य निर्माण कार्य यथाशीघ्र गतिमान है। अनेकों ऐसी उपलब्धियां उनके कार्यकाल में दिखाई देती है जो कि अनुकरणीय हैं।
कुछ समय पूर्व आपदाग्रस्त क्षेत्रों और भूस्खलन के समय, विकट परिस्थितियों में मौके पर जाकर लोगों की जान- माल के रक्षा की। शांति काल में स्वस्थ और सुंदर योजनाएं बनाकर शासन के सम्मुख लाना, जनता दरबार में जनता की आवाज को सुनकर समुचित हल निकालना,यथाशीघ्र समयबद्ध कार्य योजना के द्वारा प्रत्येक कार्य को संपन्न करवाना, उनका बहुत बड़ा गुण है। आखिर हो भी क्यों नहीं, देहरादून जैसे जनपद के जिलाधिकारी के रूप में जिन्होंने दायित्व निर्वहन किया हो, टिहरी का प्रशासन उनके लिए आसान बात है।
वर्तमान जिलाधिकारी जितने ही सरल व्यक्तित्व के धनी हैं उतने ही कड़क मिजाज अफसर भी हैं मजाल क्या कि पत्ता भी खड़क जाए! कार्यालय की गुणवत्ता से लेकर जनता की समस्याओं का समाधान, नई-नई योजनाओं को बनाकर शासन के सम्मुख रखना और यथा समय प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां प्राप्त करवाना उनकी कार्य क्षमता को दर्शाता है। साहित्यकार का दायित्व बनता है कि अच्छे लोगों, अच्छाई और अच्छे कार्यों को समाज के सम्मुख भी प्रस्तुत करे।
