टिहरी में सीवेज शोधन संयंत्रों की समीक्षा, मानकों की अनदेखी पर फर्म पर ₹6.16 लाख का जुर्माना
ढालवाला का 8 एमएलडी एसटीपी जुलाई के पहले सप्ताह में होगा शुरू, एनजीटी मानकों का पालन नहीं करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
टिहरी गढ़वाल | SKS News.
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जनपद टिहरी गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों में निर्माणाधीन सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) की प्रगति एवं संचालन व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में सहायक अभियन्ता, निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई, गंगा ऋषिकेश ने जानकारी दी कि ढालवाला ऋषिकेश में निर्माणाधीन 8 एमएलडी क्षमता के सीवेज शोधन संयंत्र का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में संयंत्र का परीक्षण संचालन किया जा रहा है तथा जुलाई 2026 के प्रथम सप्ताह तक इसके पूर्ण रूप से संचालित होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि ढालवाला में ही निर्माणाधीन 300 केएलडी क्षमता वाले दूसरे सीवेज शोधन संयंत्र का लगभग 30 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
नरेंद्रनगर एसटीपी का 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण
बैठक में अधिशासी अभियन्ता, पेयजल निगम मुनिकीरेती ने बताया कि नरेंद्रनगर में निर्माणाधीन 2 एमएलडी क्षमता के सीवेज शोधन संयंत्र का लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। सीवेज पम्पिंग स्टेशन को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए भूमि का चयन कर लिया गया है तथा स्वीकृति हेतु भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की को प्रस्ताव भेजा गया है।
एनजीटी मानकों की अनदेखी पर सख्ती
बैठक में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों के अनुरूप संचालित किए जा रहे सीवेज शोधन संयंत्रों की भी समीक्षा की गई। स्थलीय निरीक्षण के दौरान कुछ संयंत्रों में अनियमितताएं पाए जाने और मानकों के अनुरूप संचालन न होने पर संबंधित अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
इसी क्रम में तपोवन स्थित 3.5 एमएलडी क्षमता के सीवेज शोधन संयंत्र का संचालन कर रही फर्म पर 6 लाख 16 हजार रुपये का आर्थिक दण्ड लगाया गया है।
बड़े होटलों में एसटीपी स्थापना होगी अनिवार्य
बैठक में उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिए गए कि जनपद के ऐसे सभी होटल एवं संस्थानों का विवरण उपलब्ध कराया जाए, जिनमें 20 से अधिक कमरे हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के मानकों के अनुसार उनके परिसरों में सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्थापित हैं या नहीं।
सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि बड़े होटल, रिसॉर्ट एवं अन्य संस्थानों में एसटीपी की स्थापना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराई जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता मानकों का पालन हो सके।
टोल फ्री नंबर का करें उपयोग
बैठक में उत्तराखण्ड जल संस्थान एवं जल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि विभागीय निःशुल्क सहायता दूरभाष सेवा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे आमजन को सीवर एवं पेयजल संयोजन संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।
अधिशासी अभियन्ता, उत्तराखण्ड जल संस्थान ने बताया कि विभाग का टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-4100 है, जिस पर संपर्क कर नागरिक अपनी शिकायतों एवं समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
