अदवाणी के जंगल में पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर वन संरक्षण का संकल्प
चिपको आंदोलनकारियों, महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फायर लाइन के नाम पर पेड़ काटने का जताया विरोध
अदवाणी, गजा। सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’। नरेंद्रनगर विकासखंड के अदवाणी (कुजणी) क्षेत्र के जंगल में फायर लाइन काटने के नाम पर चीड़ के पेड़ों के कटान के विरोध में हेंवलघाटी क्षेत्र की महिलाओं, चिपको आंदोलनकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ‘रक्षा सूत्र कार्यक्रम’ आयोजित किया। इस दौरान लोगों ने पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर जंगलों की रक्षा एवं संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में 87 वर्षीय चिपको आंदोलनकारी सुदेशा बहन ने पेड़ पर रक्षा सूत्र बांधकर वन संरक्षण का संकल्प दोहराया। उन्होंने नई पीढ़ी की महिलाओं एवं युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि चिपको आंदोलन के दौरान संघर्ष कर इस जंगल को बचाया गया था और अब इसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी की है।
चिपको कार्यकर्ता एवं बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी ने चिपको आंदोलन से जुड़ी घटनाओं को याद करते हुए कहा कि उस दौर में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद आंदोलनकारियों के हौसले नहीं डिगे। उन्होंने फायर लाइन के नाम पर अदवाणी के जंगल में पेड़ों के कटान को लेकर गंभीर आशंका जताते हुए कहा कि जंगलों की सुरक्षा के नाम पर कहीं उनका नुकसान न हो, इसकी निगरानी जरूरी है।
चिपको कार्यकर्ता दयाल भाई ने भी फायर लाइन निर्माण के नाम पर जंगलों को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका व्यक्त करते हुए वन संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
अदवाणी निवासी पूर्व प्रधानाचार्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता किशन सिंह रावत ने विभिन्न गांवों से पहुंची महिलाओं और युवाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके समर्थन से स्थानीय ग्रामीणों को जंगल बचाने के संघर्ष में मजबूती मिली है।
ग्राम प्रधान विजय भंडारी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंचायत को सूचना दिए बिना जंगल में कटान किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने वन संरक्षण से जुड़े कार्यों में स्थानीय समुदाय और पंचायत को विश्वास में लिए जाने की आवश्यकता बताई।
जिला पंचायत सदस्य शीशपाल सजवाण ने सभी लोगों से जंगल को बचाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। वहीं प्रधान भंडारगांव एवं प्रधान संगठन के पदाधिकारी संदीप पैन्यूली ने कहा कि प्रधान संगठन क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन से जुड़े विषयों को लेकर संवेदनशील है और इस संबंध में ठोस कदम उठाने पर विचार कर रहा है।
पूर्व प्रधान फूलदास डौंडिया एवं सामाजिक कार्यकर्ता धूम सिंह मंद्रवाल ने अदवाणी के जंगल को क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक विरासत बताते हुए इसके संरक्षण के लिए सामूहिक संघर्ष का आह्वान किया।
सामाजिक कार्यकर्ता अरण्य रंजन ने अदवाणी के जंगल को पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए वन कटान की आशंकाओं की गहन जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह जंगल लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा का केंद्र रहा है और इसके संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
कार्यक्रम में अदवाणी की सुविधा देवी, रोशनी देवी, महिला जागृति परिषद की सरिता मनवाल, सुनीता भंडारी एवं प्रतिमा देवी सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर माउंटेन फूड कनेक्ट की समीरा एवं सुनीता सहित हेंवल घाटी के एक दर्जन से अधिक गांवों से पहुंचीं 100 से अधिक महिलाओं, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सभी ने पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर जंगलों की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का सामूहिक संकल्प लिया।
