उच्च शिक्षा में किताबों की कमी दूर करेगी ‘स्वामी विवेकानंद उत्तराखण्ड ई-पुस्तकालय योजना’
छात्रों को एक क्लिक पर मिलेंगी ई-बुक्स, शोध पत्र, मैगजीन और डिजिटल स्टडी मटेरियल
देहरादून, 15 मई 2026।
उत्तराखंड सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देते हुए राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में ‘स्वामी विवेकानंद उत्तराखण्ड ई-पुस्तकालय योजना’ लागू कर दी है। योजना के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों को एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पाठ्यपुस्तकें, ई-बुक्स, शोध पत्र, डिजिटल कंटेंट, समाचार पत्र और मैगजीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रदेश में डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से राज्य विश्वविद्यालयों, संबद्ध महाविद्यालयों एवं अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में ई-पुस्तकालय योजना लागू की गई है।
उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है, ताकि आर्थिक एवं भौगोलिक कारणों से कोई भी छात्र किताबों से वंचित न रहे। अब छात्र-छात्राएं अपनी सुविधा के अनुसार विषयवार ई-बुक्स और अध्ययन सामग्री ऑनलाइन पढ़ सकेंगे।
एक प्लेटफॉर्म पर मिलेगा डिजिटल कंटेंट
ई-पुस्तकालय योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों और शिक्षकों को निम्न सुविधाएं उपलब्ध होंगी—
- पाठ्यक्रम आधारित ई-बुक्स
- उत्कृष्ट लेखकों की पुस्तकें
- शोध पत्र एवं रिसर्च कंटेंट
- डिजिटल नोट्स एवं रिपोर्ट्स
- समाचार पत्र एवं मैगजीन
- विषयवार ऑनलाइन अध्ययन सामग्री
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि यह योजना ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए समान रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।
तकनीकी एवं निजी संस्थानों को भी मिलेगा लाभ
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि तकनीकी शिक्षा, आयुष, चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित निजी विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय भी इस योजना का लाभ ले सकेंगे। इसके लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।
उन्होंने जानकारी दी कि—
- प्रत्येक विश्वविद्यालय को न्यूनतम ₹5 लाख वार्षिक शुल्क देना होगा।
- निजी एवं अशासकीय महाविद्यालयों सहित अन्य विभागों एवं शोध संस्थानों के लिए ₹1 लाख वार्षिक अथवा प्रति हितधारक ₹500 शुल्क निर्धारित किया गया है।
डॉ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-लाइब्रेरी को विद्यार्थियों के लिए सरल, उपयोगी एवं तकनीकी रूप से सहज बनाया जाए।
