उत्तराखंड में डॉक्टर दंपति ने उठाए स्थानांतरण और सेवा लाभ के मुद्दे, VRS की भी मांग
पति-पत्नी एक ही स्थान पर तैनाती न मिलने से नाराजगी, 30 दिन में समाधान न होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी
देहरादून/पौड़ी गढ़वाल | दिनांक: 23 मार्च 2026
उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एक डॉक्टर दंपति ने अपनी तैनाती, स्थानांतरण नीति और सेवा संबंधी लाभों को लेकर शासन के समक्ष गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। इस संबंध में उन्होंने महा निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को विस्तृत प्रत्यावेदन सौंपते हुए न्यायोचित कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित चिकित्सक ने पीजी (एमएस ऑर्थोपेडिक) पूर्ण करने के बाद शासनादेश संख्या 379892 दिनांक 17 मार्च 2026 के तहत उप जिला चिकित्सालय, कोटद्वार (पौड़ी) में तैनाती प्राप्त की। जबकि उन्होंने 01 जनवरी 2026 को ही दुर्गम क्षेत्र में तैनाती हेतु आवेदन किया था, जिस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।
⚖️ स्थानांतरण नीति पर उठे सवाल
चिकित्सक का कहना है कि उन्होंने विभाग से विधिवत एनओसी लेकर पीजी कोर्स पूरा किया है। उनकी पत्नी वर्तमान में जिला चिकित्सालय, पौड़ी गढ़वाल में ईएनटी विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। ऐसे में उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम, 2017 के तहत पति-पत्नी को एक ही स्थान पर तैनाती का लाभ मिलना चाहिए था, जो उन्हें नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि जिला चिकित्सालय पौड़ी में आर्थोपेडिक विशेषज्ञ का पद वर्तमान में रिक्त है, इसके बावजूद उनकी तैनाती कोटद्वार में की गई है, जिससे तैनाती प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
💰 वेतन और सुविधाओं में असमानता का आरोप
डॉक्टर दंपति ने आरोप लगाया है कि एनएचएम के तहत संविदा चिकित्सकों को “यू-कोड वी पे” योजना के अंतर्गत 3 से 4 लाख रुपये प्रति माह तक का मानदेय दिया जा रहा है, जबकि नियमित चिकित्सकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें दुर्गम क्षेत्र में सेवा देने के बावजूद 50% अतिरिक्त वेतन (इंसेंटिव) का लाभ नहीं दिया गया, जिससे उनके वेतन और भविष्य के लाभ प्रभावित हो रहे हैं।
🧠 मानसिक और पारिवारिक परेशानियां
अलग-अलग स्थानों पर तैनाती के कारण दंपति को मानसिक और पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इसका असर उनके कार्य प्रदर्शन पर भी पड़ रहा है।
📄 शासन के सामने रखे तीन विकल्प
डॉक्टर दंपति ने शासन से तीन विकल्पों में से किसी एक पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया है—
1️⃣ पति को दुर्गम क्षेत्र पौड़ी में पत्नी के साथ तैनात कर सभी लाभ दिए जाएं
2️⃣ वर्तमान तैनाती के साथ दुर्गम क्षेत्र के सभी वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं
3️⃣ पत्नी का स्थानांतरण कोटद्वार में कर दोनों को एक स्थान पर तैनात किया जाए।
⚠️ 30 दिन में समाधान न होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी
दंपति ने स्पष्ट किया है कि यदि 30 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे।
🧾 निष्कर्ष
यह मामला केवल एक डॉक्टर दंपति की व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की स्थानांतरण नीति, सेवा न्याय और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि शासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है।
