दिगोठी ग्राम पंचायत में “शराब नहीं संस्कार” अभियान को मिली मजबूती, शराब पर पूर्ण प्रतिबंध का ऐतिहासिक फैसला
₹11,000 जुर्माने का प्रावधान, ग्राम समाज सुधार समिति का गठन—नशामुक्त और संस्कारित समाज की दिशा में बड़ा कदम
चंबा (टिहरी गढ़वाल) | दिनांक: 2 अप्रैल 2026
विकासखंड चंबा की ग्राम पंचायत दिगोठी में सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल करते हुए ग्राम सभा ने गांव को नशामुक्त एवं संस्कारित समाज बनाने का ऐतिहासिक संकल्प लिया है। ग्राम प्रधान सोनम नेगी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में शराब के सेवन और परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
ग्राम सभा के निर्णय के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर ₹11,000 का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। ग्रामीणों ने इस फैसले को समाज सुधार की दिशा में एक मजबूत और दूरगामी कदम बताया।
🚫 “शराब नहीं संस्कार” अभियान को मिला नया बल
ग्राम प्रधान सोनम नेगी ने कहा कि गांव की पहचान उसके संस्कार, एकता और सामाजिक मूल्यों से होती है। उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज ही सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकता है। ग्राम पंचायत का यह निर्णय जनभागीदारी से सामाजिक परिवर्तन की एक सशक्त शुरुआत है।
इस अवसर पर “शराब नहीं संस्कार” मुहिम के प्रणेता सुशील बहुगुणा ने ग्राम पंचायत दिगोठी के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि जब समाज स्वयं सामाजिक बुराइयों के खिलाफ खड़ा होता है, तभी स्थायी परिवर्तन संभव होता है। उन्होंने इसे पूरे जनपद के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया।
👥 ग्राम समाज सुधार समिति का गठन
सामाजिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए ग्राम समाज सुधार समिति का गठन किया गया। समिति में कमल सिंह को अध्यक्ष, मकानी देवी को उपाध्यक्ष, मदन नेगी को सचिव, गीता नेगी को सह-सचिव और दिनेश सिंह नेगी को कोषाध्यक्ष बनाया गया।
इसके अलावा भगवान सिंह नेगी, आकाश सिंह नेगी, सरोजनी देवी, धूम सिंह नेगी, आषाढ़ सिंह और निर्मला देवी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
🌱 सामूहिक संकल्प: नशामुक्त गांव की ओर कदम
ग्राम सभा में उपस्थित सभी ग्रामीणों ने “शराब नहीं संस्कार” अभियान को आगे बढ़ाने और गांव को पूर्णतः नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पहल न केवल दिगोठी बल्कि अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगी।
दिगोठी ग्राम पंचायत का यह निर्णय सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे, तो उत्तराखंड के गांव नशामुक्त और संस्कारित समाज की दिशा में एक नई मिसाल कायम कर सकते हैं।
