श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में संकाय विकास कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स और डिजिटल शिक्षण नवाचारों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया
ऋषिकेश। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर (एफडीपी) द्वारा आयोजित एक सप्ताहीय संकाय विकास कार्यक्रम “एआई एवं एमओओसीएस के माध्यम से डिजिटल शिक्षण का विकास” के तीसरे दिन प्रतिभागियों ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) और डिजिटल शिक्षण-अनुसंधान के उन्नत विषयों पर गहन चर्चा व प्रशिक्षण प्राप्त किया।
दिन के प्रमुख सत्र
- “एआई टूल्स एवं प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग” — डॉ. जी. जैकुलिन प्रिया, चेयर, सेंटर फॉर एआई, लोयोला इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन, चेन्नई।
- प्रभावी प्रॉम्प्ट निर्माण
- संवादात्मक एआई के उन्नत प्रयोग
- शिक्षण में एआई आधारित समाधान
- “इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स” — डॉ. गौरव मीणा, कंप्यूटर विज्ञान विभाग, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ राजस्थान।
- आईओटी की तकनीकी संरचना और अवधारणाएं
- स्मार्ट डिवाइस नेटवर्किंग
- शिक्षा एवं अनुसंधान में आईओटी के नए रुझान
- “एआई: अकादमिक एवं अनुसंधान में नवाचार” — प्रो. शिखा गुप्ता, असिस्टेंट डीन, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी।
- उच्च शिक्षा में एआई के अनुप्रयोग
- डेटा एनालिटिक्स और व्यक्तिगत शिक्षण
- शोध की गुणवत्ता में सुधार
- “क्राफ़्ट, क्यूरेट, कैप्टिवेट: हर शिक्षक के लिए आवश्यक एआई टूल्स” — डॉ. दिव्या श्रीवास्तव, सह-संस्थापक, एआई रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैब्स, अजमेर।
- पाठ्य सामग्री निर्माण
- प्रेज़ेंटेशन डिज़ाइन
- छात्र सहभागिता बढ़ाने के एआई समाधान
आयोजकों के विचार
- प्रो. अनीता तोमर, निदेशक, एफडीसी — “यह प्रशिक्षण शिक्षण पद्धतियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा और वैश्विक मानकों के अनुरूप नवाचार को बढ़ावा देगा।”
- अटल बिहारी त्रिपाठी, समन्वयक — “एआई और डिजिटल उपकरण अब भविष्य की नहीं, वर्तमान की आवश्यकता हैं।”
