ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा !
कवि: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा। चिर यौवन का क्षेत्र रहा जो/ मस्ती का आगार रहा जो,
सुख समृद्धि गुलजार रहा जो/संस्कृति का केंद्र रहा जो, ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा।
धन-धान्य से पूर्ण रहा जो/सुकर्म भूमि स्थान रहा जो, मातृशक्ति को मान दिया जो/कृषि प्रधान भाग रहा जो, ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा।
अतिथि सम्मान दिया जो/छुआछूत का अंत किया जो, स्वच्छ सुर पान किया जो/उपत्यिकाओं मध्य बसा जो,
ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा।
सुरनाग भदराज प्रकट जो/सौंग अगलाड पूरित जल जो, जल धारा के समीप जो/जौनसार रवाईं निकट बसा जो,
ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा।
यमुना के इस ओर बसा जो/सुर पर्वत के छोर रहा जो,
श्रीकोट उत्तर पश्चिम तक/उत्तरांचल की गोद बसा जो, ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा।
जहां सकलाना दसजूला हो/लालूर सिलवार छैजुला हो, इंडवालस्यूं बारहजूला हो/गीत संगीत त्यौहार मरोज हो, ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा।
पर्वत रानी के समीप जो/देेहरा काशी निकट रहा जो,
धामों के भी पास बसा जो/ प्रीतम-धामी साथ रहे हों,
ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा।
स्वरोजगार केंद्र रहा जो/मिश्रित संस्कृति क्षेत्र रहा जो,
दुग्ध उत्पादन क्षेत्र रहा जो/छड़ी उद्योग जान दिया जो
ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा।
फल सब्जी व्यवसाय रहा हो/पशुपालन केन्द्र रहा जो,
खेेल संस्कृति पहचान दिया जो/मौंंणमेला ख्यात रहा हो,
ऐसा जौनपुर क्षेत्र हमारा। महिमा मंडित क्षेत्र हमारा।
(कवि कुटीर) चंबा
