दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना के अंतर्गत स्थानीय युवाओं और महिलाओं को मिला स्वरोजगार, तिवाड़ गांव बना ग्रामीण पर्यटन का नया केंद्र
टिहरी, 15 मई 2025 |
चारधाम यात्रा 2025 के शुभारंभ के साथ ही उत्तराखंड के टिहरी जनपद के होमस्टे संचालकों के चेहरे पर उत्साह और उम्मीद की रौनक लौट आई है। राज्य सरकार द्वारा संचालित “दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना” अब ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करते हुए न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर रही है, बल्कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम भी साबित हो रही है।
जनपद टिहरी, चारधाम यात्रा मार्ग का प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट है, जहां से यात्री गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पूरी कर केदारनाथ और बद्रीनाथ की ओर प्रस्थान करते हैं। इस क्रम में तिवाड़ गांव जैसे पड़ाव स्थलों पर यात्री विश्राम हेतु रुक रहे हैं। यहाँ पर स्थापित स्थानीय होमस्टे, तीर्थयात्रियों के बीच न केवल आवासीय सुविधा के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं, बल्कि पहाड़ी संस्कृति, खानपान और ग्रामीण जीवनशैली के प्रत्यक्ष अनुभव का केंद्र भी बनते जा रहे हैं।
स्थानीय स्वाद बना खास आकर्षण:
यात्रियों को यहां के पारंपरिक व्यंजनों में अत्यधिक रुचि दिखाई दे रही है। झंगोरे की खीर, मंडुए की रोटी, गहत की दाल, भट्ट की चुरकानी, काफल का जूस जैसे पारंपरिक व्यंजन विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इससे जहां स्थानीय उत्पादों की खपत बढ़ रही है वहीं ग्रामीण महिलाओं और कारीगरों को सीधा लाभ मिल रहा है।
होमस्टे संचालकों के अनुभव:
तिवाड़ गांव के होमस्टे संचालक मनोज पंवार बताते हैं,
“इस बार चारधाम यात्रा में हमारे होमस्टे और रेस्टोरेंट में यात्रियों की खासी भीड़ देखी जा रही है। सरकार की होमस्टे योजना से हम जैसे लोगों को न सिर्फ रोजगार मिला, बल्कि गांव में भी रोज़गार के नए दरवाजे खुले हैं। मुझे 2022 में 35% सब्सिडी के तहत होमस्टे शुरू करने का अवसर मिला था, और अब सरकार द्वारा सब्सिडी को 50% कर देने से युवाओं में नया उत्साह है।”
इसी क्रम में “न्यू एकांत होमस्टे” की संचालिका संगीता रावत कहती हैं,
“हमारी कोशिश होती है कि आने वाले यात्रियों को सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और अपनापन मिले। हमारे व्यंजनों की तारीफ सुनना और उन्हें दोबारा हमारे पास लौटते देखना आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देता है। राज्य सरकार की इस योजना ने हमें घर बैठे रोजगार दिया और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।”
पर्यटकों की प्रतिक्रिया:
शिक्षा विभाग से जुड़ी पर्यटक प्रोफेसर हेमलता, जो कई बार उत्तराखंड भ्रमण पर आ चुकी हैं, ने कहा:
“इस बार यात्रा के दौरान मुझे होमस्टे में ठहरने और पारंपरिक व्यंजन चखने का अवसर मिला। यह अनुभव किसी भी लक्ज़री होटल से कम नहीं रहा। उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं धरातल पर नजर आ रही हैं, खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में। युवाओं और महिलाओं द्वारा जिस मेहनत और ईमानदारी से काम किया जा रहा है, उसका सकारात्मक परिणाम उन्हें ज़रूर मिलेगा।”
ग्रामीण पर्यटन को मिला नया आयाम:
दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना के माध्यम से जहां एक ओर शहरों से दूर पर्यटन का विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर गांवों में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ने लगी हैं। 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी, सरल ऋण प्रक्रिया और स्थानीय उत्पादों के प्रयोग को बढ़ावा देने जैसे प्रयासों से यह योजना राज्य में ग्रामीण पर्यटन के मॉडल के रूप में सामने आ रही है।
भविष्य की संभावनाएं:
होमस्टे योजना न केवल एक व्यवसायिक अवसर है, बल्कि यह पर्वतीय क्षेत्रों के पलायन को रोकने, संस्कृति के संरक्षण, और पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण कदम है। यदि इसी तरह सरकार का समर्थन और स्थानीय लोगों की भागीदारी बनी रही, तो उत्तराखंड का हर गांव एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।
