टिहरी बांध प्रभावित 98 गांवों में भवन निर्माण के नक्शा स्वीकृति नियमों को निरस्त करने की मांग, ग्रामीणों में आक्रोश
TADA के दायरे में आए टिहरी के 77 और उत्तरकाशी के 21 गांवों को लेकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग, ग्रामीणों ने बताया नियम को जनहित के विपरीत
टिहरी गढ़वाल, 24 अगस्त 2026। टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (TADA) के दायरे में शामिल टिहरी और उत्तरकाशी जिलों के 98 गांवों में भवन निर्माण एवं विकास कार्यों के लिए नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों की ओर से अब इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से की गई है।

इस संबंध में नमामि गंगे टिहरी के जिला संयोजक अक्षत पवन बिजल्वाण ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में भवन निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृति संबंधी नियम को निरस्त करने तथा जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया है।
21 अगस्त की सूचना के बाद बढ़ी चिंता
पत्र में कहा गया है कि TADA द्वारा 21 अगस्त 2026 को जारी सूचना के अनुसार उत्तराखंड शासन की अधिसूचना संख्या 1522/V(1)/2013-01(04)/2013 के तहत टिहरी और उत्तरकाशी जिलों के कुल 98 गांव टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण के अंतर्गत शामिल हैं।
प्राधिकरण की ओर से जारी सूचना के अनुसार इन गांवों में आने वाले सभी आवासीय एवं गैर-आवासीय भवनों के मानचित्रों की स्वीकृति की कार्रवाई टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण, कोटी कॉलोनी, टिहरी गढ़वाल के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए भवन निर्माण एवं विकास उपविधि/विनियम 2011 (संशोधन 2015) के अनुसार मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से सामान्य ग्रामीणों को अपने गांव में भवन निर्माण अथवा अन्य निर्माण कार्य कराने के लिए अतिरिक्त औपचारिकताओं और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है।
टिहरी के चार तहसीलों के 77 गांव TADA के दायरे में
उपलब्ध सूचना के अनुसार टिहरी जिले की चार तहसीलों के कुल 77 गांव TADA के दायरे में आते हैं।
इनमें—
- टिहरी एवं कण्डीसौड़ तहसील — 28 गांव
- प्रतापनगर तहसील — 20 गांव
- जाखणीधार तहसील — 17 गांव
- घनसाली तहसील — 12 गांव
शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा उत्तरकाशी जिले की चिन्यालीसौड़ तहसील के 21 गांव भी टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आते हैं। इस प्रकार टिहरी जिले के 77 और उत्तरकाशी के 21 गांवों को मिलाकर कुल 98 गांव प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल हैं।
ग्रामीणों में नियम को लेकर नाराजगी
पत्र में कहा गया है कि प्राधिकरण के दायरे में आने वाले गांवों में आवासीय एवं गैर-आवासीय भवनों से संबंधित मानचित्र स्वीकृति की कार्रवाई अब प्राधिकरण कार्यालय के माध्यम से की जाएगी। इस सूचना के बाद संबंधित क्षेत्रों के ग्रामीणों में असंतोष और चिंता की स्थिति बनी हुई है।
पत्र के अनुसार विधानसभा टिहरी, धनोल्टी, प्रतापनगर, घनसाली और यमुनोत्री क्षेत्र के ग्रामीणों में इस व्यवस्था को लेकर नाराजगी है। ग्रामीणों का तर्क है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश लोग अपनी पारंपरिक जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार छोटे स्तर पर भवन निर्माण एवं मरम्मत कार्य करते हैं। ऐसे में अतिरिक्त स्वीकृति प्रक्रिया उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
मुख्यमंत्री से नियम निरस्त करने की मांग
जिला संयोजक, नमामि गंगे टिहरी अक्षत पवन बिजल्वाण ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि ग्रामीणों की समस्याओं और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए आवासीय भवन निर्माण के लिए लागू नक्शा स्वीकृति संबंधी इस नियम को निरस्त करने के लिए जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
उन्होंने पत्र में कहा है कि टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से पुनर्वास, विस्थापन और विकास से जुड़ी समस्याएं रही हैं। ऐसे क्षेत्रों में भवन निर्माण संबंधी नियमों को लागू करते समय ग्रामीणों की व्यावहारिक कठिनाइयों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।
ग्रामीणों को सरल प्रक्रिया की उम्मीद
टिहरी बांध प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों के लिए आवास निर्माण केवल विकास गतिविधि नहीं, बल्कि पुनर्वास और स्थानीय जीवन-व्यवस्था से भी जुड़ा विषय है। ऐसे में ग्रामीण चाहते हैं कि भवन निर्माण से संबंधित स्वीकृति प्रक्रिया सरल, पारदर्शी, कम खर्चीली और स्थानीय स्तर पर सुलभ हो।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और TADA के दायरे में शामिल 98 गांवों के ग्रामीणों की आपत्तियों एवं आशंकाओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
