पितृ विसर्जन अमावस्या पर करें यह काम, तृप्त होंगे आपके पितृ
पितृ विसर्जन अमावस्या, यदि किन्हीं कारणों से पितृपक्ष में अपने पितरों का श्राद्ध न किया हो! तो कल तर्पण कर उन्हें तृप्त कर सकते हैं। यह भी किया जा सकता है।
पीपल में पितरों का वास माना गया है, पितृ विसर्जन अमावस्या पर पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और गाय के शुद्ध घी का दीपक लगाएं।
सर्वपितृ विसर्जन अमावस्या पर किसी ब्राह्मण को भोजन के लिए घर बुलाएं या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़ आदि हो का दान करें।
इस अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें। इससे भी पितृ गण प्रसन्न होते हैं। पितृ विसर्जन अमावस्या पर अपने पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें। इससे भी पितर प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं।
इस अमावस्या पर चावल के आटे से 5 पिंड बनाएं व इसे लाल कपड़े में लपेटकर नदी में प्रवाहित कर दें। अमावस्या पर गाय के गोबर से बने कंडे को जलाकर उस पर घी-गुड़ का धूप दें और पितृ देवताभ्यो अर्पणमस्तु बोलें।
इस अमावस्या पर कच्चा दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में प्रवाहित करें। ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा।
पितृ पक्ष का आखिरी दिन पितृ विसर्जन अमावस्या होती है। इस दिन कुल के सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। यदि उनकी मृत्यु तिथि पता न हो, तो आप पितृ विसर्जन अमावस्या पर उनका तर्पण कर सकते हैं।
पितृ पक्ष की अमावस्या को सूर्यास्त से पहले ये उपाय करना है। इस उपाय में एक स्टील के लोटे में, दूध, पानी, काले तिल और जौ मिला लें। इसके साथ कोई भी सफेद मिठाई, एक नारियल, कुछ सिक्के और एक जनेऊ पीपल के पेड़ के नीचे जाकर सबसे पहले ये सारा सामान पेड़ की जड़ में चढ़ा दें।
इस दौरान सर्व पितृ देवेभ्यो नम: का जप करते रहें। ये मंत्र बोलते हुए पीपल को जनेऊ भी चढ़ाएं। इस पूरी विधि के बाद मन में सात बार ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करें और भगवान विष्णु से कहें मेरे जो भी अतृप्त पितृ हों वो तृप्त हो जाए।
इस उपाय को करने से पितृ तृप्त होते हैं पितृ दोष का प्रभाव खत्म होता है और उनका आशीर्वाद मिलने लगता है। हर तरह की आर्थिक और मानसिक समस्याएं दूर होती हैं।
“ज्योतिषाचार्य श्री हर्षमणि बहुगुणा
