पीएम-पोषण और समग्र शिक्षा की समीक्षा बैठक में डॉ. धन सिंह रावत ने रखे अहम सुझाव, बच्चों के भोजन और शिक्षा बजट बढ़ाने की मांग
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक; उत्तराखंड के नवाचारों की हुई सराहना
देहरादून/नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026 | सरहद का साक्षी, डिजिटल मीडिया
उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रधानमंत्री पीएम-पोषण योजना एवं समग्र शिक्षा अभियान की समीक्षा बैठक में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, विद्यालयों के विकास कार्यों तथा पर्वतीय राज्यों की आवश्यकताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव केंद्र सरकार के समक्ष रखे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में भारत रत्न सी. सुब्रह्मण्यम प्रेक्षागृह, आईसीएआर पूसा, नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय समीक्षा बैठक में देशभर के राज्यों के शिक्षा मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
उत्तराखंड के कार्यों की केंद्रीय मंत्री ने की सराहना
बैठक का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने उत्तराखंड द्वारा पीएम-पोषण योजना और समग्र शिक्षा अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की विशेष सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया है और उसके प्रयास अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय हैं।
पीएम-पोषण योजना में सामग्री लागत बढ़ाने का सुझाव
बैठक में डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों को अधिक पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए पीएम-पोषण योजना की सामग्री लागत (Material Cost) में वृद्धि की जानी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि—
प्राथमिक स्तर पर सामग्री लागत 10 रुपये प्रति छात्र की जाए।
उच्च प्राथमिक स्तर पर इसे 15 रुपये प्रति छात्र किया जाए।
उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक कदम होगा।
भोजनमाताओं के मानदेय और किचन निर्माण पर भी रखा प्रस्ताव
विद्यालयी शिक्षा मंत्री ने भोजनमाताओं के मानदेय में वृद्धि की भी मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए विद्यालयों में किचन-कम-स्टोर निर्माण के लिए 50 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
समग्र शिक्षा अभियान में व्यय की बाध्यता कम करने की मांग
डॉ. रावत ने समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत मिलने वाले केंद्रीय अंश की अगली किस्त जारी करने के लिए निर्धारित 75 प्रतिशत व्यय की अनिवार्यता को घटाकर 50 प्रतिशत करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के कारण कई राज्यों को समय पर अगली किस्त प्राप्त करने में कठिनाई होती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विशेष परिस्थितियों में विभिन्न मदों के बीच व्यय करने में आवश्यक शिथिलता प्रदान की जाए।
अन्य महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे
डॉ. धन सिंह रावत ने बैठक में निम्न सुझाव भी दिए—
पर्वतीय राज्यों के लिए वार्षिक रखरखाव अनुदान में वृद्धि।
सीपैक्स (CIPAX) परिसंपत्तियों के रखरखाव हेतु मानव संसाधन एवं मानदेय की स्वीकृति।
एनआईओएस (NIOS) के डेटा का यू-डाइस प्लस (UDISE+) से एकीकरण।
राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क गणवेश राशि बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति छात्र करना।
भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के आधार पर प्रत्येक तिमाही केंद्रीय अंश समयबद्ध जारी किया जाए।
उत्तराखंड के नवाचारों को मिली सराहना
बैठक के दौरान डॉ. धन सिंह रावत ने उत्तराखंड में पीएम-पोषण एवं समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत किए जा रहे नवाचारों एवं उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।
राज्य सरकार द्वारा शिक्षा एवं पोषण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय एवं अधिकारियों ने सराहना की और उत्तराखंड के मॉडल को प्रेरणादायी बताया।
मुख्य बिंदु (Highlights)
✅ पीएम-पोषण योजना में भोजन की सामग्री लागत बढ़ाने का सुझाव।
✅ प्राथमिक स्तर पर 10 रुपये और उच्च प्राथमिक स्तर पर 15 रुपये सामग्री लागत की मांग।
✅ भोजनमाताओं के मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव।
✅ समग्र शिक्षा अभियान में 75% व्यय की शर्त घटाकर 50% करने की मांग।
✅ उत्तराखंड के नवाचारों की केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने की सराहना।
