पुजाल्डी में तीन दिवसीय ‘ध्यांणता मिलन सम्मान’ समारोह संपन्न, सैकड़ों ध्याणियों और लोक कलाकारों का हुआ सम्मान
मौल्यार फाउंडेशन की अनूठी पहल बनी सांस्कृतिक समागम का केंद्र, हजारों लोगों ने देखा उत्तराखंड की लोक परंपराओं का भव्य संगम
चंबा, रिपोर्ट – सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’।
विकासखंड चंबा के सुदूरवर्ती गांव पुजाल्डी में मौल्यार फाउंडेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय “ध्यांणता मिलन सम्मान समारोह” (वार्षिकोत्सव) का भव्य समापन हो गया। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता को समर्पित इस अनूठे आयोजन के हजारों लोग साक्षी बने। समारोह में सैकड़ों ध्याणियों (गांव की विवाहिता बहनों) का सम्मान किया गया, वहीं दर्जनों लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का मंच मिला।
समारोह का आयोजन मौल्यार फाउंडेशन के संस्थापक विनोद लेखवार, सह-संस्थापक अनीता लेखवार, अध्यक्ष गुड्डी थपलियाल, टिहरी प्रजामंडल के अध्यक्ष वीर सिंह पंवार तथा सुरेश्वरी मठ एवं मां सुरकंडा मंदिर पुजारी संगठन के लेखवार बंधुओं के सहयोग से संपन्न हुआ।
मां सुरकंडा की परंपरा से जुड़ा है पुजाल्डी गांव
पुजाल्डी गांव के लेखवार ब्राह्मण आदिकाल से मां सुरकंडा देवी के पुजारी के रूप में जाने जाते हैं। गांव में स्थित सुरेश्वरी मठ क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां भव्य मंदिर का निर्माण भी किया जा चुका है।
गांव के ही प्रतिभाशाली युवा विनोद लेखवार की पहल पर आयोजित यह कार्यक्रम सांस्कृतिक नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा। आयरलैंड में लगभग दो दशक तक कार्य करने के बाद अपने गांव लौटे विनोद लेखवार ने सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से इस भव्य आयोजन की शुरुआत की।
सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र की विभूतियों का सम्मान
समारोह में समाज, संस्कृति, साहित्य, पर्यावरण और लोककला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक किशोर उपाध्याय एवं सुमन उपाध्याय, ब्लॉक प्रमुख सुमन सज्वाण एवं अरविंद सज्वाण, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, देहरादून से आए पंकज होल्कर, पर्यावरणविद् विजय जड़धारी, जिला पंचायत सदस्य गीता डबराल सहित अनेक गणमान्य लोगों ने सहभागिता कर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
कविता, लोकगीत और ढोल सागर की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
प्रख्यात जनकवि सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ ने अपनी चर्चित कविता “लगता है मौल्यार आ गया” का प्रभावशाली पाठ किया। वहीं लोकगायक रवि गुसाईं, पूनम सती, सुमन गौड़, सीमा पंडरियाल और जीतराम कंस्वाल ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
ढोल सागर के ज्ञाता उत्तम दास ने पारंपरिक तालों की आकर्षक प्रस्तुति देकर उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपरा का जीवंत परिचय कराया। इस अवसर पर विधायक किशोर उपाध्याय द्वारा हस्तशिल्प विशेषज्ञ सर्वजीत खत्री को भी सम्मानित किया गया।
भविष्य में और भव्य आयोजन का संकल्प
समापन अवसर पर विनोद लेखवार, वीर सिंह पंवार, ग्राम प्रधान श्रीमता लेखवार, प्रवीण लेखवार, रमेश लेखवार ‘अत्रि’ सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी अतिथियों, कलाकारों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस आयोजन को और अधिक व्यापक एवं भव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
इस अवसर पर विनोद नेगी, रघुभाई जड़धारी, शक्ति जोशी, महेश पैन्यूली, विनोद सुयाल, गुड्डी रावत, ओम प्रकाश लेखवार, जवाहर लेखवार, कमल सिंह जड़धारी, जगदंबा प्रसाद सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
