फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का पाँचवाँ दिन : बौद्धिक संपदा अधिकार पर जागरूकता कार्यक्रम
“Empowering Educators through IPR Literacy and Innovation” थीम पर केंद्रित विविध व्याख्यान
टिहरी गढ़वाल, 16 सितम्बर 2025:
“फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP)” के पाँचवें दिन का आयोजन पूरी तरह बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR) पर केंद्रित रहा। दिनभर चले सत्रों में विशेषज्ञों ने कानूनी, आर्थिक, अंतरराष्ट्रीय और व्यावहारिक पहलुओं पर गहन चर्चा की।
प्रमुख व्याख्यान और मुख्य बिंदु
- डॉ. सुधीर सिंह (दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय)
- विषय: भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार : विधि और चुनौतियाँ
- मुख्य बातें:
- भारत में IPR कानूनों का दायरा व्यापक, पर जागरूकता और क्रियान्वयन में कमी।
- शोध और नवाचार की सुरक्षा हेतु कानूनी ढाँचे को और मजबूत करने की आवश्यकता।
- IPR केवल अकादमिक जगत तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए भी अनिवार्य।
- डॉ. चन्द्र मोहन नेगी (दिल्ली विश्वविद्यालय)
- विषय: बौद्धिक संपदा और आर्थिक विकास : भारत के लिए सबक
- मुख्य बातें:
- पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए आधार।
- भारत के नवाचारों को संरक्षण मिलने पर देश वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बन सकता है।
- सुश्री मुस्कान रस्तोगी
- विषय 1: डिज़ाइन, SICLDR और पादप प्रजाति अधिनियम
- औद्योगिक डिज़ाइन और नई पौध किस्मों के संरक्षण की आवश्यकता।
- किसानों व वैज्ञानिकों के हित में कानूनी सुरक्षा से कृषि और औद्योगिक नवाचार को बढ़ावा।
- विषय 2: अंतरराष्ट्रीय पेटेंट संधियाँ
- WIPO और वैश्विक पेटेंट प्रणाली की भूमिका।
- भारत के शोधकर्ताओं व उद्यमियों के लिए अंतरराष्ट्रीय संरक्षण की संभावनाएँ।
- विषय 1: डिज़ाइन, SICLDR और पादप प्रजाति अधिनियम
विशेष वक्तव्य
- प्रो. अनीता तोमर (गणित विभागाध्यक्ष एवं निदेशक, फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर)
- ऐसे आयोजन शिक्षकों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
- IPR आज केवल कानूनी अवधारणा नहीं, बल्कि सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण का साधन है।
- भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने में IPR महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आयोजन और समन्वय
- पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सीमा बेनीवाल ने किया।
- दिनभर के सत्रों ने प्रतिभागियों को विधिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से IPR की गहन समझ प्रदान की।
