श्री सोमवारी लाल सकलानी 'निशांत'
नवीन रावत, धन प्रकाश लखेड़ा और सचिन सज्वाण की मित्रता समाज के लिए बनी प्रेरणा – शिक्षा, व्यवसाय और प्रशासन तीनों क्षेत्रों में समबाहु त्रिभुज जैसा संतुलन
✍️ सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
बचपन में जब हमने गणित की किताबों में समबाहु त्रिभुज पढ़ा था, तब केवल इतना ही समझ पाए कि उसकी तीनों भुजाएँ समान होती हैं। लेकिन जीवन के अनुभवों ने सिखाया कि यह मात्र गणितीय परिभाषा नहीं, बल्कि एक गहरा दार्शनिक और सामाजिक सत्य भी है।
हिन्दू शास्त्रों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश—इन तीनों की संयुक्त सत्ता ही परमात्मा कही गई है। ठीक वैसे ही जीवन में मित्रता का स्वरूप भी त्रिकोणीय संतुलन का प्रतीक बन जाता है—जहाँ न कोई बड़ा है, न कोई छोटा, सब समान और संगठित।
शपथ ग्रहण समारोह की यादगार झलक
बीते दिनों की बात है, जब मैं नव निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष इशिता सज्वाण के शपथ ग्रहण समारोह में गया। वहाँ तीन मित्रों को एक साथ देखकर मन प्रसन्न हो उठा। मुझे अनायास ही समबाहु त्रिभुज की परिभाषा याद आ गई—तीन भुजाएँ, तीन कोण, परस्पर समान और संतुलित।
वो तीन मित्र थे –
- नवीन रावत – शिक्षा जगत की गरिमा, 20 वर्षों तक मेरे सहयोगी रहे और आज एक इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य।
- धन प्रकाश लखेड़ा – चंबा के निकटवर्ती नारंगी गांव से, वर्तमान में केन्द्र सरकार में उच्च पद पर कार्यरत अधिकारी।
- सचिन सज्वाण – प्रतिष्ठित व्यवसायी परिवार से, जिनके परिवार ने क्षेत्र के विकास और सामाजिक उत्थान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
तीनों मित्र मंच पर नहीं, बल्कि आम कार्यकर्ताओं की तरह सहयोग करते हुए नज़र आए। यही दृश्य मन को भा गया और फ्रांसिस बेकन का निबंध “ऑफ फ्रेंडशिप” याद आ गया।
दर्शन और साहित्य की दृष्टि से मित्रता
अरस्तु ने कहा था—
“मनुष्य स्वभावतः एक सामाजिक प्राणी है। यदि उसके मित्र नहीं हैं और वह एकांतप्रिय है तो जीवन में किसी भी प्रकार का भला नहीं हो सकता।”
मित्रता केवल भावनात्मक सहारा ही नहीं देती, बल्कि वह नैतिक और व्यावहारिक जीवन की धुरी बन जाती है।
- यह मन का बोझ हल्का करती है।
- यह विचारों को स्पष्टता देती है।
- यह दुख-सुख में समान रूप से साथ खड़ी रहती है।
- और सबसे महत्वपूर्ण—यह निःस्वार्थ सहयोग और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण होती है।
यही भाव मैंने नवीन, धन प्रकाश और सचिन की मित्रता में देखा। शिक्षा, व्यवसाय और प्रशासन—तीन अलग-अलग क्षेत्र, तीनों अलग-अलग जीवन यात्राएँ, लेकिन मित्रता का बंधन ऐसा कि वर्षों बाद भी वही आत्मीयता, वही अपनापन।
मित्रता – समाज के लिए प्रेरणा
आज जब समाज में संबंध अक्सर स्वार्थ और लाभ-हानि के तराजू पर तोले जाते हैं, तब ऐसे उदाहरण एक जीवित मिसाल बन जाते हैं। ये तीनों मित्र वास्तव में एक व्यावहारिक समबाहु त्रिभुज के समान हैं—
- जिसमें न कोई अहंकार है,
- न दिखावा है,
- न स्वार्थ है,
- न प्रतिस्पर्धा है।
यह मित्रता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणादायी है।
👉 यह लेख इस बात को रेखांकित करता है कि सच्ची मित्रता समबाहु त्रिभुज की तरह होती है—समान, संतुलित और अटूट।
