शताब्दी समारोह में पर्यावरण संरक्षण का विराट संकल्प
देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित संकल्प कार्यक्रम में मानव-प्रकृति सहअस्तित्व का संदेश, संत-महापुरुषों की गरिमामयी उपस्थिति
📰 हरिद्वार | 22 जनवरी 2026
वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी एवं अखण्ड दीपक शताब्दी समारोह के क्रम में बुधवार को पर्यावरण एवं वातावरण शुद्धि को समर्पित एक प्रेरक संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन पूज्य गुरुदेव की उस दूरदर्शी विचारधारा को साकार करने का प्रयास रहा, जिसमें प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन को मानव कर्तव्य के रूप में स्थापित किया गया है।

🌱 पर्यावरण संरक्षण को युग-निर्माण का आधार बताया
शताब्दी समारोह 2026 के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि शताब्दी समारोह केवल स्मरण का पर्व नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए उत्तरदायित्वपूर्ण संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को युग-निर्माण के मूल आधारों में से एक बताते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

🙏 संत-महापुरुषों की गरिमामयी सहभागिता
इस संकल्प कार्यक्रम में आध्यात्मिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों की उपस्थिति रही। इनमें—
- जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि आचार्य जी,
- हरिद्वार एवं मुंबई की प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के अध्यक्ष पूज्य स्वामी विश्वेश्वरानंद जी,
- पतंजलि योगपीठ के संस्थापक योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी,
- उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री की रणनीतिक सलाहकार समिति के सदस्य श्री मनु गौड़ जी,
- ‘रिवरमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से विख्यात श्री रमण कांत जी,
- भारतीय सरकारी अधिकारी (VAME) श्री भूपेन्द्र कंथोला जी
प्रमुख रूप से शामिल रहे।

🌳 2400 से अधिक वृक्षारोपण का लिया गया संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर सभी विशिष्ट अतिथियों द्वारा तरु-पूजन किया गया। इस अवसर पर यह महत्वपूर्ण संकल्प लिया गया कि देश के विभिन्न जोनों से जुड़े गायत्री परिवार के परिजन 2400 से अधिक वृक्षों का रोपण करेंगे। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संतुलन, जलवायु शुद्धि तथा भावी पीढ़ियों के लिए हरित एवं सुरक्षित भविष्य का निर्माण करना है।
🌍 मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का संदेश
सम्पूर्ण वातावरण प्रकृति, प्राण और पुरुषार्थ के दिव्य समन्वय से ओत-प्रोत रहा। शताब्दी समारोह के अंतर्गत लिया गया यह संकल्प मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का सशक्त संदेश बनकर सामने आया, जो वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक प्रेरक पहल है।
🔹 Source Credit:
पोस्ट Dev Sanskriti Vishwavidyalaya (DSVV) के Facebook आधिकारिक पेज से साभार।
