श्रीघंटाकर्ण धाम क्वीली के पुजारी समाज की बमणगांव में हुई महत्वपूर्ण बैठक, पुजारी समाज की घंटाकर्ण धाम ट्रस्ट के प्रति दिखी गहरी नाराजगी
गजा, टिहरी: श्रीघंटाकर्ण धाम क्वीली के पुजारी समाज की बमणगांव में हुई पुजारी समाज ने बुलायी चारों थोक की बैठक, बैठक की हर परिवार तक सूचना पहुचाने में ग्राम प्रधान दिनेश बिजल्वाण व पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख ईश्वरी प्रसाद बिजल्वाण ने किया मीटिंग में आने को किया।
पुजारी समाज से आग्रह मीटिंग के समाप्ति पर पुजारी समाज ने जताया दोनों का आभार बमण गांव में हुई पुजारी समाज की आवश्यक बैठक के बारे में बताते चले कि भगवान घंटाकर्ण भगवान् आशुतोष शिव की ही तरह दयालु हैं मन्दिर में पहुच कर भक्त लोग जो भी वर मांगते हैं।
उन्हें श्री घंटाकर्ण पूर्ण करते है उनकी पूजा खेत्रपाल या छेत्रपाल के रूप में भी होती है शक्ति की तरह उनका वाहन भी शेर है श्रीफल के भेट सर्वोत्तम मानी जाती है पुष्प के रूप में कुरजा हल्दी के साथ अक्षत यहा का महात्म पौराणिक काल से रहा है।
हजारों वर्षों से वह भक्तों की चेतना मे बसे हैं बिजल्वाण जाती के चार थोक के पुजारी जिसमें निगयाणी, गिरवाणा, भदवाण, हँसवाण थोक जिनके आज के समय में लगभग 600 परिवार है जिनके पूर्वजों द्वारा सदियों से पूजा अर्चना श्रद्धालुओं की जात्रा व सक्रांति तीर्थ प्रब के अवसर पर बिकट प्रस्थिति से लेकर आज तक मूल भूत सुख सुविधाओं के न होने से, होने तक निरन्तर अपने ईस्ट के प्रति अपनी सेवाए देते आ रहे हैं।
52 सालों से समय-समय पर घंटाकर्ण मन्दिर में पूजा की बारी पर अपना समय व अन्य समय में श्रद्धालू और ग्रामीण के नाते सेवा भाव से अपना समय देने वाले पंडित मनोहारी लाल बिजल्वाण बताते है कि बिगत कुछ बर्षों से मन्दिर में पुजारियों का अपमान किया गया, जिसके चलते आज समस्या पैदा हो रही है वह बताते है यह घंटाकर्ण धाम घंटाकर्ण मूल मन्दिर है जिसका उल्लेख केदार खण्ड के देवप्रयाग माहात्म्य में वर्णित स्लोग में उल्लिखित मिलता है।
ततो वै पश्चिम भागे घंटाकर्ण इति: स्मृत: ।
भैरवो भीषणाकार: सर्वसत्त्वभयकर:।।1।।
तस्य पूजनमात्रेण सर्वसम्पंमयो भवेत।।2।
यह पौराणिक मंदिर घंडियाल देवता का मूल मंदिर है यहां पर पसवा व्यवस्था नहीं थी मंदिर की तरफ से कोई भी अधिकृत पसवा नहीं है, मंदिर में सभी पूजन व्यवस्थायें परम्परागत होनी चाहिए, ऐसा सभी पुजारी समाज के सदस्यों के विचारो को सुनने के उपरांत उन्होंने अपने विचारो में कहा, पुजारी समाज के अनुसार गलत परम्परायें बंद होनी चाहिये, जिसके प्रति पुजारी समाज ने ट्रस्ट के प्रति गहरी नाराजगी जतायी।
यही कारण है कि पुजारी समाज मन्दिर से दूरी बना रहा है सभी पुजारी समाज के लोगों ने यह साफ़ शब्दों मे कहा है कि ट्रस्ट के नियमो के अनुसार पूजा पद्दति नहीं चलेगी, पुजारी समाज की अपनी समिति बनाई जाय, जिसका बायोलोज तैयार हो, पूजा पद्दति तैयार हो उसके नियम कायदे पौराणिक तरीके से बने, जिससे घंटाकर्ण के भक्तों की आस्था और पुजारियों का सम्मान बना रहे, पुजारियों के साथ किया गया पूर्व में ब्यौहार अनुचित था।
इसी मोके पर घंटाकर्ण धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय प्रकाश बिजल्वाण ने कहा कि सम्पूर्ण पुजारी समाज अपने कर्तव्य का निर्वाहन करे, शिक्षक उपेंद्र बिजल्वाण मन्दिर में पुजारियों के न जाने पर चिन्तित दिखे और कहा कि पुजारी समाज को अपनी परम्पराओं को नहीं छोड़ना चाहिए, पुजारी अपने कर्तव्य का ध्यान रखे मर्यादा बनाए रखे, लोक गायक बिनोद बिजल्वाण व अन्य पुजारी समाज के अधिकांस उपस्थिति के अनुसार गर्भ गृह में पुजारी के अलावा प्रवेश वर्जित रहे, पुजारी केवल पूजा व्यस्था ही देखेगा व पुजारी समाज की एक कमेटी बनाई जाय।
दिनेश बिजल्वाण ने कहा कि जो पुजारी अपने आचरण का पालन न करते हुए पाया जाता है तो पुजारी समिति उस पर आजीवन प्रतिबंध लगाये। इस बैठक मे सभी उपस्थिति की सहमति पर निर्णय हुवा कि पुजारी समिति का गठन किया जाय, समिति का मुख्य उद्देश्य मन्दिर में पूजा व्यवस्था व पुजारी समाज के हक्क- हकुव की रक्षा करना है, समस्त पुजारी समाज द्वारा सर्व समति से श्री मनोहरी लाल बिजल्वाण को पुजारी समाज अध्यक्ष नामित किया गया।
पूजा का अधिकार पीढ़ियों से करते आ रहे चारों थोक का ही रहेगा। अनुष्ठान के दोरान गर्भ गृह और मन्दिर के चढ़ावा का वितरण मन्दिर पुजारी समिति और आयोजक कर्ता के आपसी विचार विमर्श के बाद वितरण किया जायेगा।
इस अवसर पर 40 के लगभग संख्या में पुजारी समाज से जुड़े चारों थोक से उपस्थिति रहे हैं, जिसमें बिनोद बिजल्वाण, दर्शन लाल बिजल्वाण, ईश्वरी बिजल्वाण, विजय प्रकाश बिजल्वाण, परशुराम बिजल्वाण, नरेन्द्र बिजल्वाण, दीपक बिजल्वाण, अशोक बिजल्वाण, वीरेन्द्र दत्त बिजल्वाण, शक्ति प्रसाद बिजल्वाण, मादी राम बिजल्वाण, संजय बिजल्वाण, अनिल किशोर बिजल्वाण, उमा दत्त बिजल्वाण, संदीप, बेद प्रकाश बिजल्वाण, जगदीश बिजल्वाण, लोकेन्द्र दत्त बिजल्वाण, हरिकृष्ण बिजल्वाण, दिनेश बिजल्वाण, गणेश बिजल्वाण, सुधीर बिजल्वाण, जगदंबा बिजल्वाण आदि उपस्थित थे।
