एम.बी.पी.जी. कॉलेज हल्द्वानी में वैदिक साहित्य व्याख्यान माला का आयोजन, विशेषज्ञों ने वेदों की महत्ता पर रखे विचार
- वैदिक साहित्य के विविध आयामों पर हुआ विस्तृत विमर्श
- प्रो. कमला पंत और ले. डॉ. कमलेश शक्टा रहे मुख्य वक्ता
- ऑनलाइन और ऑफलाइन मिलाकर कुल 237 छात्रों ने लिया भाग
एम.बी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित वैदिक साहित्य व्याख्यान माला के चतुर्थ सत्र का आयोजन हुआ। इस सत्र में विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रोफेसर कमला पंत (एम.बी.पी.जी. कॉलेज हल्द्वानी) और ले. डॉ. कमलेश शक्टा (विभागाध्यक्ष संस्कृत, स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लोहाघाट, चंपावत) ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
प्रथम सत्र में प्रो. कमला पंत ने वेदों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की विशिष्टताओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि उपनिषद वेद साहित्य का वह भाग है जो जीवन के चेतन-अचेतन पक्ष को जोड़ता है। उन्होंने गोपथ ब्राह्मण, अरण्यक ग्रंथ और ब्राह्मण ग्रंथों के सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व को भी रेखांकित किया।
द्वितीय सत्र में डॉ. कमलेश शक्टा ने वैदिक अध्ययन के स्वरूप, “विद्” धातु से उत्पन्न “वेद” शब्द के अर्थ और चार वेदों के कालखंडीय विकास पर चर्चा की। उन्होंने ऋग्वेद के मंडल और अष्टकों की रचना, आयुर्वेद, धनुर्वेद, गंधर्ववेद और धर्मवेद के विभिन्न आयामों को साझा किया। सामवेद के गायन रूपों, यजुर्वेद के शुक्ल और कृष्ण खंड तथा शतपथ ब्राह्मण के 100 अध्यायों और 14 कांडों की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने यह भी बताया कि वैदिक साहित्य के अध्ययन के लिए छः वेदांगों की रचना की गई है, जो इसकी पूर्णता के लिए आवश्यक हैं।
इस व्याख्यान में कुल 237 छात्रों ने भाग लिया, जिनमें 66 विद्यार्थी ऑनलाइन और 171 छात्र-छात्राएं ऑफलाइन माध्यम से सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम में इतिहास विभाग से डॉ. सुरेश टम्टा, डॉ. ज्योति टम्टा, डॉ. दिनेश कुमार उपस्थित रहे। प्रो. कमला पंत का स्वागत डॉ. राजेश कुमार तथा डॉ. शक्टा का स्वागत डॉ. देवेश सिंह गर्ब्याल ने किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन डॉ. महिपाल सिंह कुटियाल द्वारा किया गया।
