डॉक्टर ओएस कंडारी: मरीजों के लिए ‘सेकेंड गॉड’
रिपोर्ट: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ | चंबा/ऋषिकेश
ऋषिकेश, 26 अगस्त।
अस्पताल और कोर्ट—दो ऐसी जगह हैं जहां व्यक्ति मजबूरी में ही जाता है। न्याय पाने के लिए कोर्ट और इलाज के लिए अस्पताल। ऐसे समय पर उसे भरोसा चाहिए, संवेदनशीलता चाहिए और पारदर्शिता चाहिए। ऋषिकेश का कंडारी नर्सिंग होम व अस्पताल इन्हीं मूल्यों के कारण आम मरीजों की पहली पसंद बन गया है।
हर मरीज के लिए सुलभ और सस्ता इलाज
ऋषिकेश नटराज चौक से कुछ ही दूरी पर, आशुतोष नगर स्थित इस नर्सिंग होम की पहचान है—सुगम, सस्ता और पुख्ता इलाज। न्यूरो, गैस्ट्रो, त्वचा, डायबिटीज, लीवर संक्रमण से लेकर बड़े मेजर ऑपरेशन्स तक, यहां हर तरह का इलाज उपलब्ध है। खास बात यह है कि परामर्श शुल्क और टेस्ट रेट्स पारदर्शी रूप से प्रदर्शित हैं, ताकि मरीज और परिजनों को किसी तरह की असुविधा न हो।
डॉक्टर ओ एस कंडारी: अनुभव और संवेदनशीलता का संगम
डॉ. ओ एस कंडारी का नाम पूरे गढ़वाल अंचल में सम्मान के साथ लिया जाता है।
उन्होंने पहले निर्मल हॉस्पिटल और हिमालयन इंस्टिट्यूट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दीं। वर्ष 2001 में अपना नर्सिंग होम स्थापित किया और तब से हजारों रोगियों को नया जीवन दिया।
वे केवल इलाज ही नहीं करते बल्कि पथ्य-अपथ्य और जीवनशैली पर भी मरीजों को इस तरह समझाते हैं जैसे कोई प्रोफेसर अपने छात्रों को पढ़ा रहा हो। यही कारण है कि उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों से भी लोग उन्हें देखने ऋषिकेश पहुंचते हैं।
मरीजों और परिजनों के प्रति विशेष संवेदना
डॉ. कंडारी स्वयं प्रशासनिक और चिकित्सकीय कार्यों पर निगरानी रखते हैं। मरीज की स्थिति देखकर कई बार वे परामर्श शुल्क में रियायत भी कर देते हैं। रिपोर्ट के लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि डॉक्टर साहब न केवल बेहतरीन चिकित्सक हैं बल्कि मधुर व्यक्तित्व और विनम्रता से भरे इंसान भी हैं।
क्यों कहलाते हैं ‘सेकेंड गॉड’
रोग से ग्रसित व्यक्ति जब डॉक्टर कंडारी के पास आता है तो वह केवल इलाज ही नहीं बल्कि आत्मविश्वास भी लेकर लौटता है। यही कारण है कि लोग उन्हें “सेकेंड गॉड” यानी मरीजों का भगवान कहते हैं।
