ग्राम छाम, पट्टी खास, टिहरी गढ़वाल की होनहार बेटी सिमरन रतूड़ी ने लद्दाख की सबसे ऊंची चोटी पर फतेह हासिल की। सेना से सेवा निवृत्त पिता की प्रेरणा और खुद की कड़ी मेहनत से उन्होंने पूरे भारत में बनाई विशिष्ट पहचान
टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड की धरती हमेशा से वीरता और साहस की मिसाल रही है। इसी कड़ी में टिहरी गढ़वाल जिले के ग्राम छाम, पट्टी खास की बेटी सिमरन रतूड़ी ने एक और इतिहास रच दिया है। सिमरन ने लद्दाख की सबसे ऊंची चोटी पर फतह हासिल कर न केवल अपने गांव का नाम रोशन किया बल्कि पूरे उत्तराखंड और भारतवर्ष को गौरवान्वित किया है।
सिमरन रतूड़ी के पिता भारतीय सेना से सेवा निवृत्त हैं। पिता की प्रेरणा और अनुशासन ने उन्हें जीवन में उच्च शिखरों तक पहुंचने की हिम्मत दी। सिमरन ने सेना में रहते हुए अपने साहस और लगन से पूरे देश में एक अलग पहचान बनाई है।
उनकी यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि मेहनत और संकल्प के दम पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। आज सिमरन रतूड़ी पूरे उत्तराखंड की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
गांव के लोग और पूरा क्षेत्र उनकी इस कामयाबी से बेहद खुश और गर्व महसूस कर रहा है। उत्तराखंड की यह बेटी आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श है।
